बेटी है एक कवि की कविता 
बेटी है सागर की सरिता 
बेटी में एक प्यारापन 
बेटी में है एक भोलापन 
फूलो सी होती है बेटी 
जब खुद होती सम्मानित 
करती है सबको सम्मानित 
बेटी पर तुम करो तो नाज 
बेटी गौरव कल ओर आज