यादों में समाई हुई,चाहत ये तुम्हारी है
पलकों पे है छाई हुई, तस्वीर तुम्हारी है
कैसे कहूँ मैं सबसे अपनी प्रीत पुरानी है
तुझे चाहा है इस दिल ने
तेरे नाम है ये जिंदगी
तू पास रहे न रहे
पर दिल में है तू ही तू
एक पल भी जो बिछड़े अगर,जान जाती हमारी है
कैसे कहूँ मैं सबसे अपनी प्रीत पुरानी है
इस प्रीत की रीत सदा
शिद्दत से निभाना तुम
सदा दोगे साथ मेरा 
ये वादा निभाना तुम
विश्वास न तोड़ना कभी,ये विनती हमारी है
कैसे कहूँ मैं सबसे अपनी प्रीत पुरानी है...
यादों में समाई हुई ,चाहत ये तुम्हारी है
पलको पे है छाई हुई,तस्वीर तुम्हारी है
कैसे कहूँ मैं सबसे अपनी प्रीत पुरानी है...
                    नेहा शर्मा