क्या है ये प्रदूषण क्या कोई बताएगा
क्या अपने तर्कों से मुझे समझाएगा
मुझे समझ नही आता ये प्रदूषण या ये स्वछता अभियान
मेरे लिए तो ये धरती है एक कूड़ा दान
मैं हूँ विधाता का बनाया हुआ रूप अनोखा
कोई कहे मानव मुझको कोई कहे इंसान
लेकिन मेरे अंदर नही बची कोई मानवता
जानवर तो क्या ओर मनुष्यों का भी रखता नही मैं कोई मान
बहुत समझाते मुझे सब कि पेड़ नही काटने हैं
इनके बिना हम सब की तंग सारी साँसे हैं
नदियों को भी हमे सदा रखना चाहिए शुद्ध
नही तो पानी के बिना कई पीढियां होंगी अशुद्ध
लेकिन मैं मनुष्य किसी की बात नही मानता हूँ
फैलाता गंदगी चारों ओर पेड़ भी काटता हूँ
नही रखता मैं चारों तरफ की स्वच्छ जलवायु
चाहे उसके बदले में कम हो सबकी आयु
मुझे अच्छा लगता है कार में से कागज फैंकना
मुझे अच्छा लगता है समुंदर किनारे गंदगी फैलाना
नही भाता मुझे अपना देश स्वच्छ बनाना
चाहे उसके बदले में प्रदूषित हो सारा जमाना
मैं मानव हूँ समझदार सिर्फ पैसे कमाने में
घर मे हर सामान महंगा लेकर आने में
नही रखना मुझे पानी शुद्ध चाहे फिल्टर पड़े लगवाना
चाहे कितना पढ़ लिख जाऊँ लेकिन प्रदूषण है फैलाना।
ॐ नमः शिवाय
🙏🙏🙏🙏🙏

0 टिप्पणियाँ