अब स्वामी केशवदास और बाकी सभी शाम तक उस जँगल  में पहुँच जाते हैं और रात से पहले ही उन्हें हर हालत में अर्नव को खोजना है।वो सभी जँगल में प्रवेश करते हैं और इधर-उधर देखते हैं।जँगल बहुत बड़ा और भयानक है इसीलिए अर्नव को ढूंढना नामुमकिन सा लग रहा है।पीहू बहुत चिंतित होकर स्वामीजी से कहती है कि इतने बड़े जँगल में हम अर्नव को कहाँ ढूंढेंगे?

स्वामी जी कहते हैं तुम चिंता न करो पुत्री मैं ध्यान लगाकर अभी सही दिशा का पता करता हूँ।ये कहकर वो आँखे बंद कर लेते हैं।

दूसरी ओर,अनीश और आदित्य अर्नव को बातों में उलझा कर जँगल के ठीक मध्य में ले जाते हैं।वो अर्नव से ये कहकर ले कर आये हैं कि आज अनीश का जन्मदिन है इसीलिए किसी एडवेंचर पर चलते हैं।वो एक जीप में गए हैं पार्टी का सभी सामान मौजूद है।जँगल बहुत भयानक है और चारो ओर कोहरा छाया है।अब वो तीनो एक स्थान पर गाड़ी रोक लेते हैं और वही पर पार्टी कर रहे हैं।अर्नव पर उन्होंने सम्मोहन शक्ति से सम्मोहित करके अपने वश में किया हुआ है।इसीलिए उसे कुछ नही पता कि क्या हो रहा है उंसके साथ।अनीश की भयानक होती जा रही है।उसकी आँखों मे खून उतर आया है।वो अब धीरे-धीरे शैतान के जैसा होता जा रहा है।

दूसरी ओर,केशवदास जी ने उस स्थान की दिशा का पता लगा लिया है जिस दिशा से उस स्थान तक पहुंचा जा सकता है जहाँ पर अर्नव और अनीश है।अब वो सभी उस दिशा की ओर चल पड़ते हैं।भयानक जँगल में चलना भी बहुत कठिन हो रहा है।सभी के मन में अर्नव की चिंता है कि वो कैसा होगा।पूजा को भी अर्नव की हद से ज्यादा याद आ रही है कि वो ठीक भी होगा या नही?उसे उसके साथ बिताया हुआ हर लम्हा याद आ रहा है।

दूसरी ओर,अर्नव की अचानक ही नजर अनीश के बदले हुए रूप पे जाती है।उसका रूप इतना ज्यादा भयानक हो चुका है कि देख पाना भी बहुत मुश्किल हो जाए।



अर्नव जैसे ही उसके चेहरे की ओर देखता है तो उसके होश उड़ जाते हैं।उसका शरीर बिल्कुल ठंडा पड़ जाता है और भय की वजह से पसीने से ही नहा जाता है। वो अब मुड़कर आदित्य की ओर देखता है तो उसका रूप अनीश से भी ज्यादा भयानक हो जाता है।जिसकी अर्नव ने कल्पना भी नही की थी।




उसकी मोटी-मोटी आंखे गोल होकर ओर भी भयानक लग रही थी।उसके कान और नाक बहुत अधिक लम्बे और तीखे हो चुके थे!दांत भी उन दोनो के बहुत भयानक हो चुके थे।दोनो बहुत ही खूंखार लग रहे थे।

अब अनीश अर्नव से कहता है आओ मेरे प्यारे भाई हम शैतानों की दुनिया मे तुम्हारा स्वागत है।

अर्नव हद से ज्यादा डर चुका है।उसे ये नही समझ आ रहा कि वो जो देख रहा है वो हकीकत है या ख्वाब।अब वो हिम्मत करके काँपते हुए शब्दों से पूछता है क क कौन हो तुम?

अनीश अब मुस्कुराने लगता है और कहता है मुझसे मत डरो मेरे भाई,मैं कोई ओर नही बल्कि तुम्हारा ही भाई हूँ।तुम्हे अपनी दुनिया मे लेकर आया हूँ।

ये बात सुनकर अर्नव बहुत ज्यादा हैरान होकर कहता है ये क्या कह रहे हो तुम?मेरा कोई  भाई नही है!अगर ऐसा होता तो मुझे मेरे घरवाले जरूर बता देते।

अब अनीश उसे कहता है अर्नव यही सत्य है कि तुम्हारी पीहू माँ ने ही मुझे जन्म दिया है लेकिन कभी उतना प्यार नही दिया जितना कि तुम्हे दिया उन्होंने।मैं अभागा तो बस मां के आँचल की छाँव के लिए तरसता ही रह गया।इसीलिए आज तुम्हे उठा कर लाया हूँ  ताकि अब तुम्हे मारकर मैं अपनी जगह पर जा सकूँ।

अनीश ये बात सुनते ही डर जाता है और पीछे हटने लगता है।तभी पीछे से उसे आदित्य पकड़ लेता है,जिसका रूप अनीश से भी ज्यादा भयानक है।

अब अनीश हँसते हुए कहता है ये मेरा ही गुलाम आदित्य है जो तुम्हे यहाँ से बिल्कुल नही जाने देगा।

अब अर्नव हद से ज्यादा डर चुका है ,वो समझ चुका है कि वो इन शैतानों में बुरी तरह फँस चुका है।