करके कुछ कर्म निस्वार्थ भाव से
पा ले प्रभु की भक्ति
कट जाएगा भव बंधन सब
मिल जाएगी जन्म-मरण से मुक्ति
करता जा सत्कर्म तू
सेवा ही बना ले अपना धर्म तू
कर दे समर्पित स्वयं को,ईश्वर शरण
पा लेगा ईश्वर का मर्म तू
इस नश्वर संसार में कोई नहीं है तेरा,
जीवन के अंतिम क्षण तक करते हैं सब मेरा-मेरा
स्वर्ग यहां नर्क यहां सबकी होनी है दुर्गति
मन लगा ईश्वर के भजन
हो जाएगी तेरी मुक्ति
सत्येंद्र पाण्डेय 'शिल्प'
गोंडा उत्तरप्रदेश

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