पूरी दुनिया के जज़्बात एक तरफ,
वो रूहानी मुलाकात एक तरफ,
पहली मुलाकात का वो सुहाना एहसास,
शायद ही कभी बयान होगा, मिलना बिछड़ना तो तकदीर है, चलते-चलते रहा में किसी अजनबी डगर पर मुलाकात हो गई,
फिर कदमों की रफ्तार को रोककर उन लम्हों में खामोशी से बात हो गई, एक पल में न जाने कैसी मुलाकात हो गई,
कुछ ऐसी बात हो गई,
कुछ भी नहीं था जिंदगी में और जिंदगी से मुलाकात हो गई,
ख्वाब में मुकम्मल  मुलाकात हो गई,
जो कभी ना सोची थी कुछ ऐसी बात हो गई,
जो कभी ना सोची थी कुछ ऐसी बात हो गई।
प्रिया धामा