ज़ब मुझे इनकार है उनकी मोहब्बत से
तो इस दिल को हमसे इतना ऐतराज़ क्यूँ है
ए फलक की तारों तुम हमें इतना बता दो
ये चाँद भी आज इतना खोया खोया क्यूँ है.....!!
जिसे मैं सोचना भी नहीं चाहती दिमाग़ में भी
वो मेरे दिल पे ख्याल बनके ऐसे छाया क्यूँ है
जितना नज़रअंदाज़ करू पर खो ही जाती हूँ
की ये चाँद भी आज इतना खोया खोया क्यूँ है.....!!
हमेशा तो हमारे बिच टकरार ही होता आरहा था
पर आज वो हमें देख कर ऐसे मुस्कुराता क्यूँ है
कही होना जाऊ पागल मैं उसकी हरकतों से
पता नहीं ये चाँद भी आज इतना खोया खोया क्यूँ है.....!!
खुद हैंरा हूँ की कैसे ये गजब होगयी दिल से
आज उनके याद में ये इतना धड़कता क्यूँ है
नहीं पता क्या मंसूब है इस सर्द मौसम का फिज़ाओ में
जो ये चाँद भी आज इतना खोया खोया क्यूँ है....!!
लगा दिया है हमने उनके अहसासों पर पहरा कयी
फिर भी इन आँखों में ख्वाब उनका ही क्यूँ है
कही एकरार तुम्हे भी तो नहीं नैना उनके चाहत का
वरना यूँ बेवजह ये चाँद आज इतना खोया खोया क्यूँ है....!!
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नैना.... ✍️✍️

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