परिचय




वो बच्चा हर जगह घूम रहा है और कौशल्या उसे देख कर डर रही है।पीहू उसी के पास बेहोश पड़ी है।अब वो बच्चा कौशल्या की ओर हो बढ़ रहा है।उस भयानक बच्चे को अपनी ओर आता देखती है तो चीख मारने लगती है।उसकी चीखों से स्वामी केशवदास जी और  बाकी सभी भी अंदर आ जाते हैं।वो देखते हैं कि ठीक उनके सामने वो चुड़ैल का बच्चा खड़ा है।इतना छोटा होने के बावजूद भी उसके चेहरे पे मुस्कान है और आँखो में खून उतर आया है।वो देखने मे इतना खतरनाक लग रहा है कि कोई भी डर जाए।

अब इससे पहले कि केशवदास कुछ करते वो अपना एक हाथ उठाता है और उसके हाथ से ही इतनी भयंकर हवा चलती है कि वो सभी उस हवा से दूर जाकर गिरते हैं।अब वो अपने आँखों से तेज रोशनी निकालता है जिससे प्रभाव से नीरज की रस्सियाँ टूट जाती हैं और वो आजाद होकर अपने उसी बेटे के पास दौड़ आता है।वो उसे गले लगाता है और कहता है मेरा बच्चा तू आ गया,बहुत इन्तेजार किया है हमने तेरा।इससे पहले के कोई  कुछ समझता और उसकी शक्तियों को सामना करता वो हवा की तरह नीरज के साथ गायब हो जाता है।सभी बस देखते ही रह जाते हैं और चुड़ैल का बच्चा गायब।पीहू,कौशल्या,केशवदास और गुरुजी सभी है लेकिन नीरज उस बच्चे के साथ गायब है।

अब कौशल्या केशवदास से पूछती है अब क्या होगा स्वामी जी?

वो भी बहुत चिंतित है और कहते हैं मैं नही जानता कि अब क्या होगा लेकिन जब तक वो एक युवक नही बनता उसकी शक्तियाँ अधूरी है।लगता है ये बात नीरज जानता था इसीलिए वो उसे लेकर चला गया!जब तक वो 18साल का नही होता तब तक कोई खतरा नही लेकिन उसके बाद वो ऐसी तबाही लाएगा जिसे रोकना  बहुत कठिन हो जाएगा।इसीलिए हमे निरन्तर अब अपनी शक्तियों को बढ़ाना होगा और अब मेरे जीवन का एक ही मकसद है उसे ढूँढकर खत्म करना,जबतक तो मुझे अपनी मौत को भी रोककर रखना होगा!हे भगवान जब तक मैं उस चुड़ैल के बच्चे का अंत नही कर देता मुझे मृत्यु मत देना।

अब चारो ओर शांति फैली हुई है और खूबसूरत शैतानी शीशे का अंत हो चुका है अगर फैला है तो बस चारो सवेरा।

17साल बाद-

कौशल्या अपने गाँव मे है और शांति की जिंदगी जी रही है।पीहू को उसने हमेशा ही अपनी बेटी माना और उसकी शादी अपने ही छोटे बेटे राघव से करवा दी।आज दोनो एक सुखी वैवाहिक जीवन जी रहे हैं वो भी गाँव से बहुत दूर हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर सोलन में।कौशल्या नही चाहती कि उस चुड़ैल के बच्चे का साया भी उन दोनों या उनके बेटे अर्नव पे पड़े।


आज अर्नव का प्रथम दिन है कॉलेज में और पीहू उसके माथे पर तिलक लगाकर उसको दही मिश्री खिलाती है।आज वो बहुत खुश है की आज से वो कॉलेज जाएगा ।वो माँ से आशिर्वाद लेकर विदा लेता है।

उसके कॉलेज जाते ही पीहू महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने  बैठ  जाती है तो राघव उसे कहता है  कि कितने सालों से देख रहा हूँ कि जब भी अर्नव स्कूल ,कॉलेज या कहीं बाहर जाता है तो तुम पूरा दिन जाप करती हो उसके नाम का।तुम भूल क्यों नही जाती सब?अब कुछ गलत नही होगा देखना।

पीहू गम्भीर होकर कहती है आप इसीलिए कह रहे हैं कि आपने  उसे अपनी आँखों से नही देखा ,मुझसे पूछिये मैंने उस चुड़ैल के बच्चे को खुद जन्म दिया है।अपनी आँखों से उसकी शक्तियाँ देखी हैं।ये कहते हुए उसके चेहरे पर पसीना आ जाता है और वो घबरा जाती है।राघव उसे गले से लगाकर तसल्ली देता है और कहता है जब तक मैं तुम्हारे साथ हूँ कुछ नही  होने दूँगा।

ॐ नमः शिवाय
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