ममता की मूरत होती हैं माँ
कितनी खूबसूरत होती हैं माँ
तुझ से ना कोई प्यारा जग में
कर दूँ सब न्यौछावर तुझ पे
मेरे सारे दुःख दर्द हर लेती हैं
चोट लगी मुझे पर मां रोती हैं
आता है सुकून मुझकों कितना
जब हाथों में मेरा हाथ लेती हैं
रखती हूं मैं कदम जहां जहां
बिछा देती आंचल वहां वहां
चुन कर मेरी राहों के कांटे
बिखेर दे दुआ के फूल वहां
सींचा हैं जिसने अपने लहू से मुझे
शब्द नहीं हैं पास क्या उपमा दूं तुझे
लगा दिया जिसने अपना पूरा जीवन
मुझे संस्कारित कर इंसान बनाने को
लगती प्यारी जब हंसते हंसते
माफ़ कर जाती मेरी हर नादानी
जोड़ नहीं है कोई तेरी ममता का
चारों ओर फैला आंचल तेरे प्रेम का
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश

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