करेगा नित्य पाप जो
फिर कैसे होगा पार
ऐसी कोई बूटी नही जो
करे पापी का उद्धार
फिरे घमंड में चूर हो
जिस मोह माया के
ना रोक सकेगी ये दौलत
विनाश तेरी काया के
जिस माया को कमाने में
तूने लहूँ गरीब का चूस लिया
दुर्मति में आकर तूने ऐसे ही
कुंभ पाप का भर लिया
भूल गया तू उस रचना कार को
जिसने तुझें बनाया
निर्बुद्धि होकर तूने जाने
कितना दुराचार कराया
चाहें कितने जतन करो मनन करो
जितने करो उपाय
ऐसा कोई बाण नही जिसे तू
अपने कुकर्मो पर चलायें
कहे साधु संत महात्मा तुझमें ही
विराजे हैं परमात्मा
उसके सिवा कोई और
नही जो तुझे बचाये
हरि भजन एक नाव हैं
जिसमे रास्ते हजार
किसी ना किसी रूप में
किसी ना किसी ढंग से
पापी से भी पापी को एक पल में
करें भव सागर से पार
हरि भजन कर ले बन्दे फिर चाहें
किये हो पाप हजार
फिर कोई बाधा ना आएगी
हो जायेगा तेरा बेड़ा पार ।।
नेहा धामा " विजेता " बागपत ,उत्तर प्रदेश

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