सजाओ दीप खुशियों का,
महापर्व का मौसम आया है।
फिज़ाओं ने भी रुख बदल कर,
शीतलता साथ लेकर आया है।।
धनतेरस से रुप चतुर्दशी का,
माँ लक्ष्मी ने आशिष बरसाई है।
आया दीपोत्सव घर घर में,
सबके मन को हर्षाया है।।
भाई - बहन के नेह का,
मांँ लक्ष्मी को भी हर्षाया है।
इस पर्व को भाई दूज रूप में,
स्वर्ग में भी देवों ने मनाया है।।
इस जहां में प्रेम हो आलम का,
वरदान यही मांगूंगा "राम"।
सभी सुखी, सभी निरोग रहे ,
इस धरा में भूखे न कोई सोए *"राम"*।।
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राम रतन श्रीवास "राधे राधे"
बिलासपुर छत्तीसगढ़


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