बदले बदले अपने अंदाज बहुत है 
किस ने क्या दिया क्या लिया याद बहुत है 

आते हुए हर एक को आदाब अर्ज करते रहे 
जाना है तो जाइए  दिल के जज़्बात  बहुत है 

इश्क़ में जी हुजूरी भी करनी होगी पता न था
खुद को बहला लिया इश्क की शर्तें बहुत है 

बहती हुई नदी या रुका हुआ पानी नाले का
हर चीज़ का अपना जायका है  गर प्यास बहुत है 

अहसास होता नहीं हर आवाज पर हासिल हो
बमुश्किल मिले चांद के तलबगार बहुत है ।।।


© रेणु सिंह " राधे " ✍️
कोटा राजस्थान