जीवन में किसी न किसी मोड़ पर एक गलती सबसे होती है। अपनी गलती पे लोग हमेशा जज बन जाते हैं। स्वीकार नहीं करते लेकिन अपनी गलती का अहसास होना उसे स्वीकार करना एक श्रेष्ठ कर्म है। जो हमारे चरित्र की सत्यता को दर्शाता है। गलती मान लेने से कोई छोटा नहीं
हो जाता है अपनी गलती का एहसास करना और सच्चे
ह्रदय से स्वीकार करने पे हमारे अंदर असीम सकारत्मक
शक्ति का निर्माण होता है। वही अगर हम अपनी गलती को नहीं स्वीकारते हैं तो हमारे अंदर एक डर पैदा हो जाती है। क्योंकि की हमारी आत्मा कभी स्वीकार नहीं करेगी
हमारी गलती को। अपनी गलती का अहसास करना एक बहुत बड़ा गुण है..............।
                               *******ऋचा कर्ण✍✍🙏🙏