न्याय होगा तब जब हम मिलकर आवाज उठाएंगे
अब अपनी बेटियों को घर में नही छुपाएँगे
अब वो भी लेंगी खुली हवा में साँस
हैवानों से डरकर उनके पँख नही काटेंगे
घुटन भरी जिंदगी अब गवारा नही हमें
उड़ना है आसमान में अपनी जिंदगी खुद सवारेंगे
आओ चलो मिलकर करें ये प्रण
कभी भी किसी से डरकर नही करेंगे खुद को ध्वस्त
अगर कोई लेगा हमारी बहादुरी के इम्तिहान
तो कर देंगे सब पस्त चाहे फिर जाए हमारी जान
आओ चलो मिलकर इस दहलीज को लाँघते हैं
रस्मों रिवाजों को छोड़ पीछे हवा में चिड़िया की तरह चहकते हैं
आओ तोड़े समाज के झूठे बनाए हुए नियम
जो औरत को कम हैं आंकती और करती घरों में बंद
अब छोड़ के चूल्हा चोंका हम भी आगे आएंगी
दहलीज को ससुराल की लांघ कर नॉकरी पर भी जाएँगे
नही डरेंगे किसी भी गंदे और वहशी इंसान से
अब मदद के लिए हम किसी से नही बुलाएँगे
अब उठाकर हथियार खुद ही चलाना है
हम नही हैं पुरुष से कम ये उनको भी दिखलाना है
लेकिन नही लांघेंगे अपने संस्कारों की दहलीज
सिर्फ लाँघनी हमने झूठी रस्मों की दहलीज
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ॐ नमः शिवाय
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