भारतीय वीर जवान जब युद्ध मे लड़ते लड़ते मौत के पहलू मे सोके शहीद होने वाला होता है,तभी अपनी जीवन संगिनी को आख़री संदेश सुनाता है उस संदेश मे वो आशाओ का दीप जलाये रखता है, वो अपनी पत्नी को ये नहीं कहे पाता की वो अब कभी न लौट पायेगा, तब वो कहेता है की जब तुम पीपल के पैड के सारे पर्ण गिन लोगी तब तक मे लौट आऊंगा,...तब तक मे लोट आऊंगा...
गिनती रहु सुबह शाम
पीपल की छाँव तले पीपल पान
संदेश भेजियो बलम मोरे
आवियो जब गिनलो सारे पान
वाट निहारु बरसो बरस से रे
विरह मे तड़पुं नैनन बरसे बरसो रे
ललाटे तिलक करियो जब
तूने कियो है वादों आवेगो शर्द
शर्द तो बीते देर हुई
आंशू की पुरवाई भी ढेर हुई
ग्रीष्म की तपती रेत मे खड़ी रहु
उगमणे इंतज़ार लिए झूरती रहु
बितेना लम्हे बारिश के मौसम
जब चले पुरवाई मे ढलती रहु
चुनरी की कोर भी मैली हो गयी
आंशूओ की बुँदे निचोड़ती रही
करती रही सवाल विरह की वेदना भी
पूछे मुझे कभी न ख़त्म होनेवाला इंतज़ार भी
क्या कभी तेरा साजन आएगा भी?
क्या कभी तेरा साजन आएगा भी?...
भारत के विर जवानो ने हमेशा हमारे देश को गौरव प्रदान किया है। देश को सर्वोपरि रखा है , देश के प्रति अपना जीवन समर्पित सेवा में चित्रित किया जाना भारतीय सेना के अधिकारी की सच्ची कृतज्ञता को दर्शाता है। रक्षा कर्मियों के परिवार सच्चे नायक हैं क्योंकि तनाव और कठिनाइयों के बीच वे दबाव में नहीं गिरते हैं। वे न केवल सच्चे साहस के अधिकारी होते हैं, बल्कि वे धैर्य और सकारात्मकता के साथ अपने भाग्य को धारण करते है
सैनिकों की जीवनसाथी की वेदना तो लग्न बंधन में बंधने से पहले ही शुरू हो जाती है, क्योंकि उन्हें पता होता है कि शायद उन्हें अपनी आधी जिंदगी पति से दूर रह कर गुजारनी पड़े.अपनी जिंदगी के पन्नों मे अपने पति का साथ बहुत कम लिखा होता है ओर ये भी मानसिक दौर मन मे छाया रहेता है की कब उनके पति का साथ उनसे छूट जायेगा,फ़िरभी वो हल्की सी हंसी मे पूरा जीवन बिता देती है उन हल्की सी मुश्कुराहट के पीछे सागर से भी गहेरा दर्द समेटा हुआ होता है
एक शहीद अपनी अंतिम क्षण मे बहुत कुछ कहेना चाहता है.. अपनी धर्मपत्नी, अपने संतानो के लिए
बहुत कुछ सोच लेता है उस चंद पलो मे वो आँखों से यही गुजारिश करता है...
सन्नाटे मे गुजरा जीवन
मेरी जीवन संगिनी का
कोई तो रोशनी की किरण फैलाना
दर्द मे कभी आंशू गिराए
कोई तो दामन उनका थामलेना
रौनक चहेरे पर मेरे बच्चों की
कभी कम न हो पाए
कभी जीवम मे उनके
खुशियाँ बनके जगमगाना...
अल्पा मेहता
#एकएहसास

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