वसुधा बड़बड़ाती हुई ऑफिस के लिए निकली पता नहीं आज तो पक्का  ट्रेन छूट ही जाएगी।
जब वो स्टेशन पर पहुंची तो ट्रेन सरक रही थी।वो दौड़ती दौड़ती जल्दी से अंतिम डिब्बे में चढ़ पाई।
चढ़ क्या पाई ,किसी मजबूत हाथ ने उसे अंदर खींच लिया।मजबूत हाथों ने उसे थाम लिया था वरना गिर जाती।
थोड़ा संभली तो उसने खुद को उस अजनबी से छुड़ाया।
और खाली सीट पर बैठ गई।सामने की सीट पर वो अजनबी भी बैठ गया।
खामोशी थी दोनों तरफ से ।आखिर सिद्धार्थ ने चुप्पी तोड़ी।आप कहां जा रही है?
जया ने कहा जी यहीं  एनडी एग्रीकल्चर कॉलेज में क्लर्क  हूं।
अरे वाह! मैं भी उसी में पढ़ाता हूं,आप को कभी देखा नहीं?
जी मैने कल ही ज्वाइन किया है।
सिद्धार्थ कुछ कहता तभी जया का फोन बजा ।उसके बेटे ने फोन किया था।
अमन 4 साल का था, जया ने अभी अभी नौकरी पाई थी,अपने पति की जगह।पढ़ी लिखी थी लेकिन पति को लगता था कि जया परिवार संभाले।
जया खुश थी ,अपने छोटे से परिवार में जिसमे वो ,उसका पति और बेटा था,लेकिन शायद किसी की उसकी खुशी पर नजर लग गई थी ,रवि की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
साल भर तक वो अवसाद में रही , मां ने आकर उसे और बेटे को संभाला।


साल भर की दौड़ धूप के बाद उसे कॉलेज भी क्लर्क की नौकरी मिल पाई।
सिद्धार्थ उसे  बीच बीच में कनखियों से देख रहा था।
स्टेशन आ गया ,दोनों उतर गए।स्टेशन से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर उनका कॉलेज था।
दोनों के बीच संवादहीनता की स्थिति  बनी रही ।दोनों अब ज्यादातर स्टेशन ,कॉलेज में टकरा ही जाते ।
धीरे धीरे जया की हिचक खत्म होने लगा।दोनों में काफी बात होने लगी।
सिद्धार्थ ने उसके दुख और अकेलेपन को जाना।घर भी जाने लगा ।,रित्विक जया का बेटा वो भी सिद्धार्थ से घुल मिल गया।
सिद्धार्थ भी अकेला था , मां पिता गांव में रहते थे।
कॉलेज की छुट्टियां हो रहीं थी ,सिद्धार्थ इस बार 4 दिन के लिए गांव चला गया। जया का मन नहीं लग रहा था ,अब छोटी,बड़ी राय सबमें  सिद्धार्थ शामिल रहता।
गांव चला गया और मुझे बताया नहीं ,जया बड़बड़ा रही थी।
तभी कॉल बेल बजी। जया ने दरवाजा खोला ।सामने दो वृद्ध दंपत्ति थे ,और उनके पीछे कुछ लोग थाल लिए खड़े थे।
जया कुछ समझ नहीं पा रही थी ।तभी वृद्धा ने कहा , अंदर आने नहीं कहोगी बहू!!
बहू!!! जया को झटका लगा।तभी पीछे से मुस्कुराता सिद्धार्थ सामने आ खड़ा हो गया।
कैसा लगा मेरा सरप्राइज!
इस बार जब मैं गांव गया तो , मां मेरे पीछे शादी के लिए पड़ गई ,जब मैने तुम्हारे बारे में बताया कि तुम विधवा और एक बच्चे की मां हो।
क्या वो तुम्हें पसंद है, मां ने मुझसे उल्टा पूछ लिया।
और जब मैने कहा _हां,फिर क्या था तैयार होकर अपनी बहू से मिलने आ गई।
जया शर्म से लाल हो रही थी।उसने तुरंत सिद्धार्थ के मां ,और पिता के पांव छुए

उसे अपनी किस्मत पर भरोसा नहीं हो रहा था,क्या जिंदगी दुबारा उसे एक बार फिर से जीने  का मौका दे रही है।
कुछ ही दिनों में सिद्धार्थ और जया परिणय सूत्र में बंध गए। 
रित्विक को  भी पिता  मिल गए।
समाप्त