तेरे हाथों में अगर हाथ मेरा हो,
हर कदम पर अगर मिले साथ तेरा हो,
कुछ तेरी बातें होगी कुछ मेरी बातें होगी,
हमसफ़र अगर साथ हो तो जिंदगी खूबसूरत होगी।
आँखो ही आंखों में समझेंगे दिल का हाल,
लफ्ज़ मौन होंगे दिल में अनेकों होंगे सवाल,
रूठना-मनाना, हँसना-हँसाना, यूँ ही चलता रहे,
सिलसिला न थमे अगर यूँ ही प्यार के फूल खिलते रहे,
दिल के जज्वात को विश्वास की डोर से बाँधूँगी,
बनकर पतझड़ की पाती एक नया संगीत सुनाऊँगी,
तेरी मदहोश सांसों में सरगम की तरह बस जाउंगी,
मिले अगर बारिश अश्क़ों की गमों की धूप भिगाऊंगी ,
न रहे इश्क की दास्तां अधूरी मुहब्बत का दीप जलाऊंगी,
कुछ तुम्हारी कुछ हमारी इश्क की सुनहरी दास्तां सुनाऊँगी।
दिल के वरकपर इश्कस्याही से भावनाओंकी कलमचलाऊंगी,
अगर मिले साथतेरा तो जन्नत सेभी खूबसूरत जीस्त बनाउंगी।
शीला द्विवेदी "अक्षरा"
उत्तर प्रदेश "उरई"

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