दिल की दहलीज़ पर तेरे कदमों के निशां देखने की हसरत रहती है, 
यूं तो देती है दुनिया दस्तक इस दरवाज़े पर, 
तू जो चुप है मगर, तो हर आवाज़ बेमानी सी लगती है! ..

शालिनी अग्रवाल 
जलंधर