सुना है उसके घर में भी एक बेटी है
जो अक्सर दूसरे की बेटी को खिलौना समझकर खेलता है
सुना है अपनी बेटी को गंदी नजरों से भी बचाता है
दूसरों की बेटी को देख जिसका मन मचलता है
उम्मीद की एक किरण थी मेरे पास
कि उसकी बेटी उसे इंसानियत सिखाएगी
लेकिन अफसोस हुआ देख कर कि
उसकी बेटी भी उसे बदल नही पाएगी
यही सोचती हूँ बनकर एक औरत मैं
बेटियों के बाप से भी दूसरों की बेटियों की
इज्जत अपनी बेटियों जैसी क्यों नही हो पाएगी
देती थी बद्दुआ रब ऐसे लोगों का घर बेटी से भर दें
जो देखे गंदी नजरों से दूसरे की बेटियों को
रब उनके घर भी एक बेटी जरूर दे
लेकिन आज देख कर अफसोस हुआ बहुत
क्यों आदमी इतना हैवान हो गया
घर में होती हैं बेटियाँ इनकी
और बेटी की उम्र के कपड़े उतार रहा
अब अपने देश को इन भेड़ियों से बचाना होगा
जो डाले बेटियों पर बुरी नजर उन्हें बाहर लाना होगा
बदनामी के डर से नही लड़ना हमे छोड़ना
हमें ऐसे लोगों को फाँसी तक लाना होगा
तभी उम्मीद की एक किरण को हर जगह फैलाएंगे
जब हम सब मिलकर ऐसे पापियों सजा दिलवाएंगे
चलो मिलकर करते हैं संकल्प हम सब
कि हवस का भूखे भेड़ियों को उनकी औकात दिखाएंगे
जय महाकाली
🙏🙏🙏🙏🙏

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