चलो आज पूजा करते हैं गोवर्धन गिरधारी की।
नटवर नागर मुरली मनोहर कृष्णा गिरधारी की।
द्वापर में मथुरा में अवतरित विष्णु अवतारी की।
वासुदेव-देवकी से जन्में मोहन मदन मुरारी की।
पंच दीप पर्व शुभ दिवाली के दूसरे दिन होती है।
भइया दूज चित्रगुप्त पूजा के पहले यह होती है।
गोवर्धनपूजा अन्नकूटपर्व यह परिवा को होती है।
कृष्णजी इंद्रदेव का तोड़े गुमान उन्हें जो होती है।
प्रसंग ऐसे है देखें वर्षा हेतु इंद्रदेव की पूजा करते।
पूड़ी पकवान मिठाई बनाते हैं व सब पूजा करते।
कृष्ण कहे ब्रजवासी तुम गोवर्धन की पूजा करते।
इंद्रदेव को पता लगा मेरी पूजा कृष्ण रोका करते।
इंद्रदेव ये क्रोधमें आके तब ब्रज में भारी वर्षा की।
वह अभिमान के कारण मूसलाधार वृहदवर्षा की।
हाहाकार मचा ग्वालबालों ने कृष्ण से प्रार्थना की।
रोको इसे मुरारी अब तो ऐसी सभी याचना है की।
कृष्ण अपने छोटी उंगली से गोवर्धन पर्वत उठाये।
ग्वालबाल गउएं सब बचने फिर उसके नीचे आये।
बने खाद्यपकवान सभीके एकदूजे में गए मिलाये।
यही बना अन्नकूट है सब मिलकर उसको हैं खाये।
इंद्रदेव को ज्ञात हुआ जब कृष्ण प्रभु की ये लीला।
उसके समझ में आया है अभिमान पड़ गया ढीला।
यह कोई और नहीं साक्षात परमब्रह्म की है लीला।
श्रीकृष्ण को शीश झुकाया माँगी क्षमा इंद्र हठीला।
इंद्र कहे हे!प्रभु आप परमपिता हैं मुझे न था ज्ञान।
नन्दलाल प्रसन्न होकर इंददेव्र को दिएहैं क्षमादान।
कृष्ण का यह नाम तबसे है गोवर्धनधारी भगवान।
गोवर्धन-अन्नकूट पूजा दोनोंहै इसका रखें संज्ञान।
जयहो श्रीकृष्ण भगवान जयहो गोवर्धनधारी की।
जय हो यशोदा नंदन की जय हो मोहनमुरारी की।
डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

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