इस जहाँ में हर इंसान के अंदर
आक्रोश जैसे प्रदूषण छुपा रहता है
कोई खुद पर हावी नहीं होते देता कभी
तो कोई जाने कितने रिश्तो को खो बैठता है
जो मिल जाते है खुशी प्यार से दो पल ही सही
वो ज़िन्दगी केलिए सुनहरे यादें बन जाते है
जिसने छीनना चाहा खुशियाँ किसीके ज़िन्दगी से
तो अपने हाथो से ही जाने अपनों को खो बैठता है
कुछ ख़्वाबों की ज़िद्द होती है आँखों में
कुछ अहसाँसे दिल में ही दफन होके रह जाती है
ख्वाहिशे पूरी करने की गर सब्र न दिल में अपनी
तो मुकाम तक पहुंच कर भी कोई अपनी मंज़िल खो बैठता है
अच्छा हो या बुरा हर अंदाज़ हम में ही कही छुपा है
देखे जो इंसानियत के नज़रो से दुनिया में हर कोई अपना है
जो वक़्त रहते न खतम कर पाये मन की प्रदूषण को
तो दुनिया की इस भीड़ में भी खुदको तन्हा कर बैठते है
दोष ईश्वर का नहीं इंसान की अंतर मन की होता है
जो अपने ज़िन्दगी में अच्छा व बुरा में किसे चुनता है
ज़ब तक है जीवन क्यों न बनाये रखे रिश्तों में पवित्रता
नहीं तो इस ज़िन्दगी में कोई खुद अपने कर्म से नर्क की दुनिया बना बठता है.....!!
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नैना... ✍️✍️

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