जनसंख्या विस्फोट से कराहती धरती
चित्रगुप्त आज मैं अपनी बहन यमुना से मिलने धरती लोक जाऊंगा ,क्या तुम मेरे साथ चलोगी?
क्यों नहीं महाराज परंतु  धरती से यमलोक आए प्राणियों का लेखा जोखा कौन देखेगा प्रभु?
ऐसा करते हैं हम अपना प्रतिरूप वहां छोड़ देते हैं,जिसे आज के युग में पृथ्वी वासी कार्बन कॉपी बताते हैं_,यमराज ने कहा।
अरे वाह महाराज ,ये तो बहुमूल्य विचार हैं।
फिर देर किस बात की चलिए।
दोनों एक कमरे में गए ,वहां उनका एक पुतला रखा था ,उसमें मंत्र की शक्ति से जान फूंक कर उन्हें सारी बातें समझा दी।
चित्रगुप्त ने कहा _महाराज क्या आप भैंसे पर जाएंगे,अब ये  2021 का भारत है,ढंग के कपड़े बदल लीजिए नहीं तो वहां के लोग हमें सर्कस में डाल देंगे।
सही बात चित्रगुप्त लेकिन अपने वाहन का क्या करें?
अभी तो हम इसी से यमलोक से चलें और धरती जाकर , मैं इसे मशीन में बदल दूंगा,।
बहन के लिए कुछ ले लूं ,बहुत दिनों बाद मिलना होगा।
ठीक है ,कुछ मणि माणिक्य ले लेते है।
ऊपर से जंबू द्वीप का भारत कितना सुंदर दिख रहा।
नीचे वे दिल्ली में उतरते हैं ,चारों ओर भाग दौड़ ,किसी को किसी के लिए फुर्सत नहीं।
दोनों की आंखें गाड़ियों की लाइट से  चौंधिया रहीं थी।फैक्ट्रियों का धुंआ उन्हें शक्तिहीन कर रहा था।चारों ओर प्रदूषण से धुंध छाई हुई थी। 
चित्रगुप्त मुझसे तो सांस भी नहीं लिया जा रहा ।
प्रभु मेरा भी यही हाल है।
दोनों एक बेंच पर जाकर बैठ गए। वहीं बगल में एक लड़का बैठा था ,वह यमराज के गले में पड़ा माला खींच कर भागने लगा।
अरे चोर चोर , दोनों उसके पीछे दौड़े।
वह भागता हुआ एक बस्ती में पहुंचा।दोनों ने उसे पकड़ लिया।
तुम कोई काम नहीं करते ,तुम्हें पता है चोरी करने पर तुम्हें यमलोक में क्या दंड मिलेगा।
लड़का हंसने लगा ,_इस समय खाने का इंतजाम करूं या मरने के बाद क्या दंड मिलेगा ये देखूं।
क्या?
यहां इतनी जनसंख्या है कि नौकरी नहीं है ,एक नौकरी का विज्ञापन निकलता है ,तो 1000 लोग आ जाते हैं।
तुम पढे लिखे हो? चित्रगुप्त ने पूछा।
हां, जानते हो,गांव से शहर आया की नौकरी मिलेगी ,लेकिन यहां कोई नौकरी नहीं मिली ,माता पिता बीमार हैं ,घर में 4,4बहनें हैं तो मैं चोरी न करूं तो क्या करूं?
यमराज ने कहा गुप्त तुम इसे माला दे दो।इसको बेचकर कुछ दिन तो इसके कट जायेंगे।
फिर वे बहन यमुना के पास पहुंचे।
यमुना यमुना ,काली ,झाग से लिपटी यमुना निकल कर आई तो दोनों को विश्वास नहीं हो रहा था।
अरे बहन तुम ये क्या हाल बना दिया तुम्हारा धरती वासियों ने।
भैया!!!! बहुत बुरी हालत है मेरी ,बहन गंगा और वसुधा  की।
कल वसुधा आई थी,उसका सीना छलनी हुआ जा रहा है।
पर क्यों? तुम सब तो धरतीवासियों को भोजन ,पानी , आसरा देती हो ,फिर क्यों ऐसा हो रहा है तुमलोगाे के साथ।

बड़ी कहानी है भैया।
ये धरतीवासी अज्ञानी हैं, वंश वृद्धि के लिए अंधाधुंध बच्चे पैदा कर रहे हैं।यहां लड़का ,लड़की में भेद मानते हैं ,कहते हैं लड़का कुलदीपक होता है ,लड़कियां पराया धन।
कुछ लोग तो इस प्रजनन शक्ति को मशीनी बना दे रहे।
जानते हो मैने सुना है कि भारत जनसंख्या में अब 2050 तक पहले नंबर पर आ जाएगा। रोजगार के लिए नित नए फैक्ट्री लग रहे और मनुष्य जीवाश्म ईंधन का प्रयोग कर उसका दोहन कर रहा।जिससे वह तो समाप्त हो ही रहा बल्कि प्रदूषण से बच्चे मानसिक विकार सहित पैदा हो रहे।
मेरा पानी अब जीवनदाई नहीं रोगदायी होता जा रहा।
मेरा दम घुट रहा है भैया ,अब मैं अपना आकार कम कर रही हूं।पानी के अभाव में ये धरतीवासी एक दूसरे से लड़ झगड़ के मारे जाएंगे।पेड़ पौधे लगातार शहरीकरण से कट गए हैं तो अब कार्बन उत्सर्जन से लोगों का दम निकल जाएगा।
अगर धरती वासी जनसंख्या नियंत्रण नहीं किए तो इसका परिणाम भयावह होगा।

यमराज और चित्रगुप्त ने कहा ,बहन तुम्हारी और सभी बहनों का हाल जान बहुत दुख हुआ , मैं पिता की सूर्य देव से बात करूंगा। 
अब चलता हूं ,नहीं तो हमारा भी दम घुट जाएगा।