मीना जी गांव की मुखिया जी की पत्नी और उनका भरा पूरा परिवार गांव की शानदार हवेली में बड़ी शान से रहते। उनके दो बेटे जो देश के बॉर्डर पर तैनात देश की रक्षा के लिए तत्पर थे। वहीं  उनकी दोनों बहुएं अति सुंदरता और शालीनता की मिसाल थी। सारा गांव उनके गुणों व खूबसूरती की प्रशंसा करते नहीं थकता था। अब उनके घर खुशियों की लहर आने वाली थी, दोनों बहुएं पेट से जो थी, जल्दी ही घर में नन्ही किलकारियां की गूंज सुनाई देने वाली थी। दोनों की संतानों का जन्म भी एक ही दिन हुआ, बस समय का फर्क था। बड़ी बहू के बच्चे का जन्म सुबह के समय हो गया। बड़ी बहू को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। घर में बधाइयों का तांता लगना शुरू हो गया। छोटी बहू की डिलीवरी सांझ को हुई, उसकी कोख से पुत्री ने जन्म लिया। अब तो जैसे हवेली में मातम सा छा गया, छोटी बहू के लिए कोई बधाई संदेश नहीं आया। मीना जी भी इस बात से काफी दुखी थी, क्योंकि वह चाहती थी कि उनकी दोनों बहुओं को उनकी ही तरह दो-दो बेटे हो, परंतु होनी को यह कहां मंजूर था। मीना जी इस वाक्या से बड़ी चिंतित थी, क्योंकि वह सारे गांव भर में अपनी झूठी तारीफों के पुल बांधकर पहले से ही बधाइयां लूट रही थी। उन्होंने जल्द ही छोटी बहू को बच्ची के साथ उसकी माँ के यहां भेज दिया। अगले ही दिन किन्नर बच्चों को बधाई देने के लिए मीना जी के घर आए। उन्होंने बड़ी बहू शीला के बेटे की खूब बलाई ली और सब को बधाई दी और उसके बाद छोटी बहू गीता के बारे में पूछने पर मीना जी थोड़ा झंपते हुए बोली कि गीता अपने मां के घर गई है। किन्नरों को पता था, कि उसको बेटी हुई है और गांव में आते-आते यह खबर भी मिल गई थी कि मीना जी इस बात से खुश नहीं है। कोई तो उनको कुछ ना कह पाया पर किन्नरों को कौन रोक सकता है। उन्होंने कहा, "छोटी बहू को भी हमें बधाई देनी है, आपने उसे मायके क्यों भेज दिया। लड़के अगर खानदान का चिराग है, तो लड़कियां भी परिवार का नाम रोशन करती हैं और वह भी घर की लक्ष्मी हैं। सेठानी जी, आज ज़माना कितना आगे बढ़ गया है, लड़कियां किसी से कम नहीं, इसलिए आप छोटी बहू को बुला लेना हम फिर आएंगे उसको बधाई देने और बच्चे की बलाई लेंगी।" और फिर सेठानी जी को बधाई देते हुए और सच्ची सीख देकर किन्नर वहां से चले गए।
प्रिया धामा
भिलाई, छत्तीसगढ़