सीरत और अयान एक सच्चे और प्यारे बंधन में बंध ही गए सब खुश थे । दो दिल दो अनजान दो परिवार एक जो हो गए । पर सीरत की दीदी तन्वी की जासूसी काम कर गयी। और अब तन्वी भी सुनिश्चित हो गयी कि सीरत सही जगह सही इंसान के साथ हैं। आखिर ये अरेंज वाला लव अपनी मंजिल तक पहुँच ही गया।
चलिए आपको इस हैप्पी एंडिंग की फुल स्टोरी बताते हैं , और सुनाते हैं तन्वी के जासूसी किस्से...
बात हैं नवम्बर की सुर्ख सर्दियों की जब अयान का परिवार पहली बार सीरत को देखने के लिए उनके घर आये थे , शादी ब्याह के मामले में अक्सर हम अति उत्साहित होते हैं सीरत भी थी पर दर्जन भर से ज्यादा लड़के उसे देख कर जा चुके थे पर बात बन ही नही रही थी । ऐसा नही हैं कि सीरत में कुछ कमी थी , वो बला की खूबसूरत थी गोरा रंग ,सुरमई आंखे गुलाब की पंखुड़ियों से होंठ , स्वभाव से भी सौम्य , हर कार्य मे निपुण और पोस्ट ग्रेजुएट थी। फिर भी एक कमी थी शायद,, जी कमी सीरत में नही सीरत के परिवार में थी, या यूं कहें कि कमी समाज का ठेका लिए लोगो की सोच में थी। सीरत बहुत छोटी थी तभी किसी बीमारी के चलते उसकी मां चल बसी , एक बड़ी बहन और एक छोटा भाई और सीरत इन तीनो को उनके पापा घनश्याम जी ने बहुत प्यार से पाल पोसकर बड़ा किया मां का भी प्यार दिया । पर मां की तरह बच्चों को समझ पाना हर किसी के लिए सम्भव नही हैं। बच्चे बड़े हुए सीरत की दीदी ने प्रेम विवाह कर लिया लड़का जात बिरादरी के था तो ज्यादा दिक्कत नहीं हुई, फिर भाई ने भी लव मैरिज की तो पानी सर से निकल गया क्यूंकि बात अब जात बिरादरी के बाहर की थी । बहुत
थू- थू हुआ सब तरफ बदनामी हुई। खैर ये दिन भी कट गए अब बात सीरत की होने लगी घर परिवार में उसकी विवाह के चर्चे होने लगे और रिश्ते भी आने लगे, पर हुआ वही जिसका सबको डर था । जितने भी रिश्ते आते भाई और दीदी के प्रेम प्रसंग का आनंद लेकर चले जाते और कोई जवाब न देते , गेंहू के संग घुन भी पीस ही जाता हैं ये कथन यथार्थ हो रहा था सीरत के जीवन में, क्यूँ की वो बेचारी बिन गलती के ही सजा पा रही थी , फिर भी बड़ा धैर्य था और पूर्ण विश्वास था ईश्वर पर उसे की एक दिन उसे समझने वाला इंसान जरूर मिलेगा जो उसकी अच्छाइयों को देखेगा और उसे अपनाएगा। और समझदार इंसान उसे मिला अयान के रूप में।
सीरत ने जब पहली बार अयान को देखा तो बस देखती रह गयी अयान पर अपना दिल हार बैठी वो पगली, पर ये तो एकतरफा बात हुई अरेंज मैरिज में एक तरफ से पसन्द करने पर कहा कुछ होगा। क्या सीरत अयान को भी पसन्द आएगी , ये तो वक़्त ही बताएगा फिलहाल तो अयान और उसका परिवार वापस चले गए, और सीरत बस इन्तिज़ार करने लगी और अपने दिल का हाल अपनी चचेरी बहन तन्वी से कहने लगी , तन्वी थी तो सीरत की चचेरी बहन पर दोनों ही सगी से कम न थी बहुत प्यार था दोनों में, न जाने क्यों तन्वी को लगने लगा कि अयान भी जरूर ऐसे ही तड़प रहा होगा सीरत के लिए और उधर से जवाब हां में ही आएगा। और देखो हुआ भी वही चार दिन में ही जवाब आ गया कि उन्हें सीरत पसंद हैं और उन दोनों की कुंडलियां भी मिल गयी अब दिल मिल गए तो कुंडलियों को तो मिलना ही था, तन्वी खुश थी बहुत खुश पर चिंतित भी थी क्यूंकि उसने सीरत को बचपन से देखा था उसके दुख देखे थे और वो सुनिश्चित करना चाहती थी कि अयान सही लड़का हैं या नहीं एक नज़र देखने से हम नही जान सकते कि वो अंदर से कैसा हैं, बस फिर क्या था सीधी साधी तन्वी ने ठान लिया सबकुछ पता करने का और बन गयी अपनी प्यारी सीरत के लिए जासूस।
जी हां जासूस और निकल पड़ी अयान के ऑफिस जहाँ वो काम करता था चुपके से बातो बातो में पता लगा लिया कि वो सच मे सरकारी कर्मचारी हैं कि नहीं, उसका व्यवहार कैसा हैं, कभी जासूसी करती हुई उसके मोहल्ले में चली जाती तो कभी उसके कॉलेज के दोस्तो से पूछताछ करती, अंदर ही अंदर सारी जासूसी कर लेने के बाद तन्वी निशचिंत हो गयी और अपनी बहन सीरत से कहा जा जिले अपनी जिंदगी कर ले अपना पहला प्यार पूरा.. और फिर अयान का परिवार एक बार फिर सीरत से मिलने आया और सबने सीरत को पसंद किया और जब अयान और सीरत आपस मे बात किये तब अयान ने सीरत को बताया कि वो सीरत को पहली नजर में ही दिल दे बैठा था, दोनों ने एक दूसरे को दिल से अपनाया और फिर क्या शुरू हो गया उनका अरेंज वाला लव.
सीरत ने भी अपनी तन्वी दीदी का दिल से शुक्रिया किया और कहा कि मैरिज अरेंज हो या लव पर हर परिवार में तन्वी दी के जैसा जासूस होना बहुत जरूरी हैं , जो अपनी जासूसी से सब कुछ पता कर ले फिर कहे जा जी ले अपनी जिंदगी... प्यार तो एक नज़र में कभी भी किसी से भी हो जाता हैं पर वो इंसान हमारे प्यार के लायक हैं या नहीं ये जानने के लिए हर परिवार में तन्वी दी जैसा जासूस होना जरूरी हैं..
तो दोस्तो आप भी जासूसी जारी रखिये मग़र किसी नेक काम के लिए !! 🙂
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थ्रीमा विनोद साहू

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