' राधा .....राधा ..... कहाॅं हों तुम ?  किशन ने लगभग चिल्लाते हुए  कहा ।' 

राधा दौड़ते हुए किशन के पास पहुॅंचती है । 
' क्या बात है किशन जी ?  आज अचानक इतनी ऊंची आवाज में आपने मुझे पुकारा ।'  राधा ने अपने पति किशन की तरफ देखते हुए कहा । 

' क्यों  मैं तुम्हें ऊंची आवाज में बुला नही सकता ?'   किशन ने गुस्से में कहा । 

' बुला सकते है लेकिन आज से पहले आपने ..... ।' 

राधा की बात पूरी हो इससे पहले ही किशन ने उसे बीच में ही टोकते हुए कहा :-  " जरूरी नहीं कि आज से पहले जो चीज हुई नहीं  वह आगे भी ना हो । मैं कई दिनों से तुमसे यह सब कुछ कहना चाह रहा था लेकिन मौका ही नहीं मिल रहा था  ।" 

यह कहकर किशन चुप हो गया और इधर - उधर देखने लगा । 

' हाॅं  कहिए ना  ! मैं सुन रही हूॅं ।'  राधा ने किशन की तरफ देखते हुए कहा । 

' मुझे तुमसे तलाक चाहिए ।'  किशन ने जल्दीबाजी में कहा । 

राधा  ने  जैसे  ही तलाक सुना उसे  किशन द्वारा बोले गए शब्दों पर यकीन ही नहीं हुआ ।  

' क्य......... क्या  कहा आपने ? मैंने ठीक से  सुना नही ।'  राधा ने हकलाते हुए कहा । 

' वही  कहा जो तुमने सुना है । मुझे तुमसे तलाक चाहिए और जल्द - से - जल्द चाहिए । मैं इसके लिए अधिक इंतजार नहीं कर सकता ।'   किशन ने कहा । 

' मुझसे कोई गलती हुई है जो आप ऐसी बातें कर रहे है ।' 
राधा ने किशन की तरफ ऑंसूओं से भरी ऑंखो से देखते हुए कहा । 

' गलती तो मुझसे हुई थी जो मैंने तुमसे शादी की । इन डेढ़ सालों में मैंने तुम्हें क्या नहीं दिया ? पैसा  .....गहनें .... कपड़े .... आदि । यहाॅं तक कि  इस सोसायटी में उठने - बैठने  लायक मैंने ही तुम्हें बनाया । तुम गरीब थी । तुमने अपने माता-पिता के पास पैसा  देखा ही कहाॅं था ?  मेरे यहाॅं आकर तुमने पैसा देखा । मेरी वजह से तुम इस लायक बनी हो । मैंने तुम्हें सब कुछ दिया  लेकिन इन सबके बदले तुमने मुझे क्या दिया ?  एक बच्चा तक नहीं दें पाई तुम मुझे ।'  किशन ने ऊंची आवाज में कहा । 

' आप ही ने तो कुछ दिनों पहले मुझे कहा था कि हमारी शादी को डेढ़ साल ही तों हुए है और वैसे भी हमारे बीच यह भी तो तय हुआ था कि दो-तीन महीने और देख लेते है  उसके बाद डाॅक्टर से मिलकर सलाह लेंगे कि हमें क्या करना चाहिए ? '  राधा ने कहा । 

' मुझे अब सिर्फ यह करना है कि तुमसे तलाक लेना है । मेरे माता-पिता भी तुमसे इसलिए खुश नहीं हैं कि तुम उन्हें इस घर का वारिस नहीं दें पा रही हो ।'  किशन ने कहा ।

' क्या  वें लोग भी चाहते है कि मेरा और आपका तलाक हो जाएं ? '   राधा ने किशन से पूछा । 

' तो क्या मैं झूठ बोल रहा हूॅं ?  तुम जानती हो आज तक मैंने उनकी मर्जी के खिलाफ कुछ भी नहीं किया है । उनकी ही मर्जी थी कि तुम जैसी गरीब घर की लड़की से मुझे शादी करनी पड़ी और आज उनकी ही मर्जी से तुमसे तलाक लेना चाहता हूॅं ।'    किशन ने जवाब दिया । 

' मुझे एक बार माॅंजी से बात कर उनके मुॅंह से यह सब सुनना है ।'   राधा ने कहा । 

' माॅं - पापा में से कोई भी अब तुमसे बात नहीं करना चाहता । तुम उन्हें फोन भी करोगी तब भी वें या तो फोन उठाएंगे ही नहीं या अपने फोन को स्विच ऑफ कर देंगे ताकि तुम उन्हें परेशान ना कर सको और हाॅं इन डेढ़ सालों में अगर तुम्हारे दिल में मेरे लिए थोड़ा सा प्यार हुआ है तो उसी प्यार का वास्ता तुम गाॅंव जाकर माॅं - पापा से नहीं मिलोगी ।'     किशन ने अपनी बड़ी - बड़ी ऑंखों को और बड़ा करते हुए गुस्से में कहा । 

' इन डेढ़ सालों में आपको ही तो प्यार किया है । आपके माॅं - पापा को अपने माॅं - पापा से कम मान-सम्मान नहीं दिया मैंने । गाॅंव में बड़े - बुजुर्गों से सुना था कि माता - पिता और अपने से बड़ों को सम्मान देना ईश्वर की स्तुति करना होता है और यह स्तुति मैंने हर पल की है । मेरे 
दिल में आपके परिवार वालों के लिए कोई बैर भावना नहीं । आपकी बड़ी बहनों को भी मैंने वही मान-सम्मान दिया है जो आज तक मैं अपनी बड़ी बहन को देती आई हूॅं । आपकी छोटी बहन इन डेढ़ सालों में जब भी हाॅस्टल से आई है मैंने उसका अपनी  छोटी बहन जैसा ध्यान रखा है । आपकी सोसायटी में आपका नाम खराब ना हो ना उसके लिए वह सबकुछ किया जैसा आप चाहते थे ।  कठिन  अंग्रेजी  भाषा सीखी , आपको हाई हील्स पहनने वाली लड़कियां पसंद थी इसकारण हाई हील्स के सैंडल भी आपकी खुशी की खातिर पहनने लगी । कई बार गिरी भी और आपने भी मना किया लेकिन मेरे लिए आपकी खुशी से बढ़कर कुछ नहीं था और आज भी आपकी खुशी की खातिर वह सबकुछ करने के लिए तैयार हूॅं जों आप चाहते है ।'    राधा ने धीमें स्वर में किशन से कहा । 

' मुझे तुमसे यही उम्मीद थी । वैसे तलाक़ के बाद तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने दूंगा । तुम्हारे माॅं - पापा और तुम्हारा  सारा खर्चा मैं उठाऊंगा । तुम भी कोई अच्छा -  सा लड़का देखकर शादी कर लेना ।'  किशन ने कहा ।

' तुम भी का क्या मतलब ? '  राधा ने अपने ऑंसूओं को पोंछते हुए किशन से पूछा । 

' तुमसे तलाक के बाद माॅं - पापा चाहते है कि पूजा से मेरी शादी हो जाएं ।'   किशन ने नजरें चुराते हुए जवाब दिया । 

' आपने अपने लिए लड़की भी देख ली ? इतनी जल्दी है आपको दूसरी शादी करने की ।'  राधा ने कहा । 

' माॅं - पापा ने देखी है और उनकी बात मैं नहीं टाल सकता  यह तो तुम्हें मालूम ही है ।'     किशन ने कहा । 

' आप अपने  माॅं - पापा से कह दीजिए कि मुझे इस घर में  और आपकी ज़िंदगी में  पाॅंच दिन रहने दें । मेरा इस घर और आप सब से डेढ़ साल का नाता है जिसे तोड़ने में मुझे कम - से -  कम  पाॅंच दिन तो लगेंगे ही ।'   राधा ने कहा । 

' मैं माॅं - पापा से पूछकर बताता हूॅं और हाॅं ये है तलाक के कागजात । जहाॅं - जहाॅं पेन से ब्लू टिक लगा है वहाॅं - वहाॅं
साइन कर देना ।'   हाॅल‌ में रखें टेबल पर कुछ  कागजात रखतें हुए किशन ने राधा से कहा । 

राधा ने किशन की तरफ देखा लेकिन कुछ भी जवाब नहीं  दिया । किशन कुछ देर वही रूक राधा के बोलने का इंतजार करने लगा । जब राधा ने उसकी तरफ से अपना मुॅंह फेर लिया तब किशन घर से बाहर निकल आया । 

वह घंटों यूं ही सड़क पर गाड़ी चलाता रहा । वह क्या कर रहा है इसकी खबर उसे  खुद ही नहीं थी लेकिन वह क्यों और किसके लिए यह सब कर रहा है  वह बखूबी जानता था ।

' पाॅंच दिन मुझे राधा का ना चाहते हुए भी  सामना करना ही होगा ।'      किशन बड़बड़ाने लगा । इसी हड़बड़ाहट में उसने राधा के मोबाइल पर मैसेज कर  पाॅंच दिन उसे उस घर और अपनी जिंदगी में रहने की इजाजत दे दी । 

' यह राधा है कहाॅं ? कहीं पर दिख भी नहीं रही । चली तो नहीं गई ?  उसने ही कहा था कि पाॅंच दिन उसे इस घर में रहने दिया जाएं । आज उसके जाने का दिन है । मुझसे मिलें बिना तो वह जा नहीं सकती ? ।'  किशन  मन ही मन में बड़बड़ाने लगा । 

' क्यों ना जाएं वह । तूने काम ही ऐसा किया है । डेढ़ साल के उसके निस्वार्थ प्रेम के बदले तुमने उसे तलाक के कागजात थमा दिए । तलाक के कागजात देने के बाद से तुम उसका सामना तक नहीं करना चाहते थे । इन  पाॅंच दिनों में भी उसे अपनी नहीं बल्कि तेरी फिक्र थी । रात को जब तुम हाॅल के सोफे पर  सो जाते  थे वह आकर  तुम्हें चादर ओढ़ाती थी । ऑफिस जाने से पहले तेरा साया जरूरी सामान तेरे बिस्तर पर हमेशा की तरह होता था । वह तो डेढ़ साल की छोड़ इन पाॅंच दिनों में भी नहीं बदली लेकिन तू बदल गया और जिससे तूने उस दिन कहा था कि तुम्हें कोई तकलीफ़ नहीं होने दूंगा उसे तलाक नाम की इतनी बड़ी तकलीफ तूने दें दी ।'      किशन के अंतर्मन ने धिक्कारते हुए  उससे कहा । 

' तुम तो जानते हो मेरी मजबूरी क्या थी ? आज राधा इस घर से जाएगी तभी तो मेरे ................ ।'  शब्दों को अधूरा छोड़ किशन अपने कमरे में ही जमीन पर बैठ रोने लगा । 

' आपको रोने की कोई जरूरत नहीं । अब सब ठीक हो गया है । कोई चिंता की बात नहीं ।'  राधा ने किशन के कंधे पर हाथ रखते हुए कहा । 

किशन ने अपनी नजरें ऊपर उठाई । राधा को एक पल देखा और फिर से अपनी नजरें नीचे जमीन की तरफ झुकाते हुए कहा :- " कुछ ठीक नहीं हुआ है । तुम जाओ यहाॅं से । तुम्हारे जाने के बाद ही सब-कुछ ठीक होगा ।' 

' माॅं - पापा अब आप लोग बाहर आ सकते हैं । मेरे समझाने से तो किशन जी समझ नहीं रहे लेकिन आपके समझाने का असर इन पर जरूर होगा क्योंकि ये आपकी बात कभी नहीं टालते ।'  राधा ने कहा । 

माॅं - पापा सुनकर किशन को लगा कि राधा ने अपने माता-पिता को मुझे समझाने के लिए बुलाया होगा क्योंकि उसने खुद के माता-पिता से बात नहीं करने के लिए उसे कसम जो  दे रखी थी और वह यह जानता था कि राधा उसका दिया  कसम कभी भी नहीं तोडे़गी । किशन जमीन पर नजरें गड़ाए बैठा रहा । 

' मेरा किशू बेटा .....।'   अपनी माॅं से अपना नाम सुनते ही किशन ने अपनी नजरें ऊपर उठाई । सामने उसके माॅं - पापा खड़े ऑंखो में ऑंसू लिए मुस्कुरा रहें थे । 

' माॅं - पापा आपलोग इस वक्त  यहाॅं ? ।'  किशन ने अपने माता-पिता के गले लगते हुए कहा । 

' हाॅं बेटा ! हम आज इस समय तुम्हारे सामने जिंदा खड़े है तो सिर्फ अपनी बहू के कारण ...... ।'   

किशन के पिता रामप्रताप आगे कुछ और बोलते इससे पहले ही राधा ने बीच में बोलते हुए कहा :-  " मेरे कारण नहीं बल्कि  मेरे इन जासूस भाईयों के कारण ।" 

' तुम्हारे भाई ? लेकिन इन दोनों को तो मैंने कभी देखा नहीं । हाॅं .... हाॅं ... याद आया ! इसे  मैंने अपने ऑफिस में देखा था ।'  एक आदमी की तरफ हाथ से इशारा करते हुए किशन ने कहा । 

' आपने बिल्कुल सही पहचाना जीजा जी । मेरा नाम है डिटेक्टिव राम और यह है मेरा पार्टनर डिटेक्टिव श्याम ।' 
अपने पास खड़े आदमी की तरफ इशारा करते हुए डिटेक्टिव राम ने कहा । 

' डिटेक्टिव राम और श्याम ?  लेकिन आप लोगों को मेरी जासूसी करने के लिए किसने कहा था ? '   किशन ने आश्चर्य के साथ दोनों जासूस की तरफ देखते हुए कहा । 

' हमारी जासूस छोटी बहन राधा ने ।'     यह कहकर डिटेक्टिव राम और श्याम दोनों ही राधा की तरफ देखते हुए हॅंसने लगें । 

' जासूस राधा ?  मैं कुछ समझा नहीं ।'  किशन ने कहा ।

' मुझे आपके द्वारा अचानक से ही तलाक की बातें सुनकर आश्चर्य हुआ था । जों इंसान मुझे इतना प्यार करता हो , वह अचानक से एक दिन आता है और कहता है कि मुझे तुमसे तलाक चाहिए ? यह बात ही मेरे दिमाग की बत्ती जलाने के लिए काफ़ी थी । बातों के क्रम में जब आप  तलाक की बातें कर रहें थे , आप मुझसे नज़रें तक नहीं मिला पा  रहें थे । मैं उसी वक्त समझ गई थी कि आपकी जुबान झूठ कह रही है । कुछ तो ऐसा  हुआ है जो आप मुझसे छुपा रहे है । याद है आपको ! उस दिन मैं रोते-रोते आपके करीब आई थी । आपका सारा सामान मैं ही रखती हूॅं । आप क्या पहनते हो ? आपको किस दिन कौन सा  रूमाल देना है ... जूते - मोजे ... यहां तक कि कौन सा पेन लेकर आप जाओगे यह सारी चीजें मैं ही आपको लाकर देती हूॅं । जब मैं आपके करीब आई तो मैंने देखा कि आज आपको मैंने जो पेन दी थी , वह तो आपके शर्ट की जेब में  है  ही नहीं बल्कि दूसरी पेन आपने अपने शर्ट के जेब में लगा रखी है । मुझे कुछ शक हुआ और जब मैं आपके थोड़ा और करीब गई तो  पेन में लगे  कैमरे ने मेरे शक को और पुख्ता कर दिया । मुझे समझ आ गया कि कोई है जो हमारी बातें सुन भी रहा है और आपसे यह सब करवा भी रहा है । फिर क्या था  मैंने भी सच्चाई का पता लगाने के लिए आपसे  पाॅंच दिन का समय माॅंगा और जब आपने कहा कि माॅं - पापा से पूछकर तुम्हें बता दूंगा तब मेरे दिमाग ने मुझसे कहा कि हो ना हो यह मामला माॅं - पापा से ही संबंधित है । ऊपर से आपने उनसे बात नहीं करने की भी कसम दिला दी जिससे मेरा शक और भी गहरा हो गया । मैंने पहले तो अपने पूरे घर का एक - एक कोना छान मारा कि कहीं मेरी हरकतों पर तो किसी की नजर नहीं है लेकिन भगवान का शुक्र था कि मुझे इस घर में कोई भी कैमरा नहीं मिला । आप जब यहां से चलें गए मैंने राम भैया को फोन किया और उन्हें सारी बातें बताकर आपका पीछा करने के लिए कहा । आप जब अपने ऑफिस में नहीं थें  मौका पाकर राम भैया ने वहां कैमरा लगा दिया था जिसे इन दोनों के अलावा मैं भी देख सकती थी । हमारे गाॅंव में एक इंस्पेक्टर चाचा है उनकी मदद से हमने आपके फोन को टैप करवाया । इन सबमें हमारी पुलिस ने  बहुत मदद की । आप किससे   मिलते थे क्या बातें होती थीं ? हमें सबकुछ मालूम हो गया था । आपके लैपटॉप में भी मैंने माॅं - पापा की किडनैप वाली फोटोज़ देखी थी । हमें पता चल गया था कि माॅं - पापा को किसने और क्यों किडनैप किया था । हम सब सही मौके की तलाश में थें और आज वह मौका आया जब किडनैप करके रखी गई जगह पर वह आया जिसने अपने निजी स्वार्थ के लिए माॅं - पापा को छः दिन से किडनैप करके रखा हुआ था । उसके आने का इंतजार ही तो पुलिस और हम कर रहें थे । पुलिस ने उसे दबोच लिया और  अभी  वह  हवालात  की  हवा  खा  रहा  है ।'        राधा ने सारी बातें विस्तारपूर्वक  कही  । 

राधा की बातें सुनकर  किशन और उसके माॅं - पापा  सभी आश्चर्य ‌में थे । किशन और राधा यह सच जानते ही थे कि यह किसकी हरकत थी ?  लेकिन किशन के माता-पिता इस सच से अनजान थे । वें देखना चाहते थे कि वह कौन है  जिसने उन्हें किडनैप कर उनके बेटे - बहू को अलग करने की साज़िश रची थी ? 

किशन अपने माॅं - पापा और राधा  के संग पुलिस स्टेशन पहुॅंचा । जब किशन के पिता ने उस शख्स को देखा तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि उनका जिगरी दोस्त उनके खिलाफ साजिश रच सकता है । वह मुॅंह फेर कर आ ही रहें थे कि उनके जिगरी दोस्त ने हाथ जोड़कर कहा :-  " माफ़ कर दें यारा ! माफ़ नहीं कर सकता तो  जो भी सजा देनी है दें दे मुझे लेकिन इस तरह मुॅंह फेरकर मत जा । मुझे समझ आ गया है कि मैंने बहुत ग़लत किया है । मैं अपनी बेटी की हालत देखकर भटक गया था । आज  तक मैंने उसे सबकुछ दिया जो उसने  मुझसे माॅंगा  लेकिन उसने अपने मन - मंदिर में कब किशन को बैठा लिया इसका मुझे पता ही नहीं चला ?  यह जानते हुए कि किशन शादीशुदा है फिर भी उसकी एक ही रट थी कि उसे किशन की दुल्हन बनना है । उसने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने उसकी शादी किशन से नहीं कराई तो वह अपनी जान लें लेगी । अपनी एकलौती बेटी की खुशी की खातिर यह गुनाह मैंने किया।' 

' अपने भाई से कहकर अपनी बेटी को किसी अच्छे साइकाइट्रिस्ट से दिखा । हर इंसान को अपने किए गुनाहों की सजा तो मिलती ही है इसलिए तुम्हें भी सजा मिलेगी और वह सजा तुम्हें  मैं नहीं  बल्कि  कानून देगा ।'  किशन के पिता यह कहते हुए पुलिस स्टेशन से बाहर निकल आए । पीछे - पीछे किशन की माॅं , किशन और राधा भी आ गए । 

' माॅं - पापा ! आप लोग घर चलिए । मैं और राधा थोड़ी देर में आएंगे ।'      किशन ने कहा । 

किशन के माता-पिता ड्राईवर के साथ घर के लिए निकल गए । 

' हम क्यों नहीं गए माॅं - पापा के साथ ?'  राधा ने किशन की तरफ देखते हुए किशन से पूछा । 

' ऐसे तो बड़ी जासूस बनी फिरती हो और अभी हो कि मुझसे पूछ रही हो कि हम क्यों नहीं गए ?'  किशन  ने राधा का हाथ पकड़ कर मुस्कुराते हुए  कहा । 

' मैं और जासूस ?'  राधा ने कहा । 

' और नहीं तो क्या ।  आज से तुम्हें मैं राधा जासूस कहकर पुकारा करूंगा क्योंकि  आज हम पति-पत्नी अगर एक साथ इस जगह पर हाथ पकड़े खड़े है तो  सिर्फ और सिर्फ राधा जासूस की बदौलत ही । अगर  राधा जासूस नहीं होती तो मैं अपने प्यार को हमेशा के लिए खो  देता ।' किशन ने कहा । 

एक साल बाद  किशन और राधा  की जिंदगी में एक नन्ही परी का आगमन हुआ जिसे हाथ में उठा कर राधा के पास लाकर  लिटाते हुए  किशन ने  मुस्करा कर कहा :-  देखो !  हमारे घर आ गई  " मेरी नन्ही राधा जासूस " । 

                                                 धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

" गुॅंजन कमल " 💓💞💗