मचो अबध में उछाह, 
राम मोरे ब्याहन जैंहें री। 
राजा जनक ने भेजो संदेशा, 
समधी  बरात लय आव राम मोरे ब्याहन जैहें  री।।
राजा दसरथ सोना लुटा रये,
 तीनऊँ रानी करें गऊदान राम मोरे ब्याहन जैहें री।
सजन लगी है बरात अबध में ,
मची महलन में भीर राम मोरे ब्याहन जैहें री।।
गुरू बसिष्ठ ने दई असीस, 
राजन जल्दी सजो सजाव राम मोरे ब्याहन जैहें री। 
सज गए रथ औ सजी पालकी, 
सब घोड़न असवार राम मेरे ब्याहन जैहैं री ।।
भरत शत्रुघ्न सजन लगे हैं,
सबरे सखा बुलाय राम मोरे ब्याहन जैहें री। 
आशा सज गए सब स्वागत में ,
रिधि सिधि ठाँड़ीं तयार राम मोरे ब्याहन जैहें री।। 
 स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर