जैसे ही मानवेंद्र ने गांव वालों को यह बताया कि संयोगिता का विवाह माधव सिंह के साथ निश्चित हुआ है तो सारे गांव वाले उस औरत की ओर देखने लगे क्योंकि उसके पास वो सबूत था जो यह साबित करता था कि बलात्कारी और कोई नहीं माधव सिंह ही है। उसने मानवेंद्र से कहा
कुंवर सा, मने लागे है कि आप छोटी बीबी सा के सगे भाई सा ना हो। अगर होते तो अपनी बहन की शादी एक इज्जत के लुटेरे से ना कराते।
क्या बोल रही हो तुम? तुम होश में तो हो ना। मानवेंद्र गुस्से से दहाड़े।
हां कुंवर सा, मैं पूरी तरह होश में हूं, लेकिन थारे को खबर को नी कि यही माधव सिंह मारी इज्जत का लुटेरा है। ये देखो उसका लॉकेट जो कुकर्म करते बखत वहीं गिर गया था इसमें उसकी पहचान है। उसी ने मारे को जीते जी मार दिया। मैं कहीं की ना रही। मारे खसम ने मारे को छोड़ दिया। मारी सास मारे को ताना देवे है। मारे बच्चों को मारे से दूर कर दिया उसने। के के सहूं मैं? मारी के गलती है। मैं उसे पा जाऊं तो उसका खून पी जाऊं।और आप अपनी बहन की शादी उससे कराने जा रहे हैं। कुंवर सा, अपनी बहन पर दया करो । माधव सिंह ने मारी इज्जत लूटी है वो इंसान के रूप में दरिंदा है कुंवर सा।आप बीबी सा को जहर माहुर खिला दो लेकिन उनकी शादी उस हैवान के साथ मत करो कुंवर सा। मारी सिर्फ इतनी सी फरियाद सुन लो मालिक। वो औरत चीख चीख कर अपनी फरियाद मानवेंद्र से कर रही थी। मानवेंद्र के मानो सांप सूंघ गया हो।वो हक्का बक्का होकर उस औरत की बात सुन रहा था। वो औरत बोले जा रही थी ।
मालिक, उस दरिंदे ने मारे बदन को कितने जख्म दिए हैं अगर मैं हुकुम को दिखाऊं तो हुकुम की रूह कांप उठेगी। अगर आपके पास हिम्मत हो तो देखिए मेरे चेहरा।आज तक मैं अपना चेहरा सबसे छुपाती रही । आज मैं अपना घूंघट सबके सामने हटाती हूं क्योंकि जिस औरत की इज्जत ही नीलाम हो गई हो। उसका घूंघट किस काम का। गांव वालों, देखो सब लोग , एक औरत का चेहरा । इतना कहकर उस औरत ने अपना घूंघट नीचे गिरा दिया। उसका चेहरा उसकी पूरी पीठ पर नीले नीले जख्म कोई पत्थर दिल भी उसकी ऐसी हालत देखकर रो देता।
मानवेंद्र ने उस औरत के चेहरे से नज़रे फेर लीं। उसे माधव के ऊपर इतना ज्यादा गुस्सा आ रहा था कि वो खुद पर नियंत्रण नहीं कर पा रहा था। उसने सब कुछ वहीं छोड़ दिया और सारे मिठाई के टोकरे फेंक दिए। उसे खुद पर बहुत क्रोध आ रहा था , आखिर एक बलात्कारी उसी के घर में रह रहा था।और वो उसे पहचान नहीं पाया। इतना ही नहीं वो उसे अपनी बहन का हाथ देने जा रहा था। धिक्कार है उस पर।
क्रोध में भरा हुआ मानवेंद्र सीधे घर गया और माधव की अंधाधुंध पिटाई शुरू कर दी। मार मार कर उसे अधमरा कर दिया। माधव को सब समझ में आ गया कि मानवेंद्र को उसकी असलियत के बारे में पता चल गया है।अब अच्छा बनने से कोई फायदा नहीं था , उसने भी मानवेंद्र को मारना शुरू कर दिया। खबर पाकर संयोगिता और दादी सा आई और उन्होंने दोनों को छुड़ाने का प्रयास किया लेकिन वो दोनों काबू से बाहर थे। संयोगिता एक तरफ खड़ी रो रही थी।और सोच रही थी कि भगवान ने उसकी कैसी किस्मत लिखी है जन्म लेते ही मां को बुला लिया और अब उसका जीवनसाथी भी एक व्यभिचारी व्यक्ति बनने जा रहा था। अगर सही समय पर मनु को पता नहीं चलता तो क्या होता? वो तो हमेशा के लिए एक नर्क में कदम रखने जा रही थी। अपने भविष्य की कल्पना करके उसका रोम रोम सिहर उठा।
तभी हवेली के बाहर शोर सुनाई दिया, माला दीदी और मोहिनी घबराई हुई सी दौड़ती हुई आई और कहा
कुंवर सा.. कुंवर सा... बाहर गांव वालों की भीड़ लगी हुई है वो लोग माधव कुंवर सा को बाहर बुला रहें हैं। उनके आगे एक औरत भी है वो सब बहुत गुस्से में हैं।
मानवेंद्र नौकरों के साथ मिलकर माधव को जबरदस्ती घसीट कर हवेली के बाहर ले गया ।और गांव वालों से बोला
गांव वालों... तुम्हारा अपराधी तुम्हारे सामने है । यह एक दरिंदा है यह तो साबित हो ही गया है।और इसे सजा भी अवश्य मिलेगी। लेकिन वो सजा इसे हम नहीं पुलिस देगी। हमने थानेदार को इत्तिला दे दी है वो अभी आते ही होंगे। आप लोग अपने हाथ इसके खून से गंदे मत कीजिए अगर आप सबको हम पर भरोसा है तो आपके साथ अन्याय नहीं होगा।
गांव वाले मानवेंद्र को अपना मसीहा मानते थे। उन्होंने उसकी बात मान ली। थानेदार आए और मानवेंद्र ने माधव को पुलिस के हवाले कर दिया। माधव उस समय शांत था उसके दिमाग में एक योजना चल रही थी। वो दादी के पैर छूने के बहाने अंदर गया और संयोगिता को अपने कब्जे में कर लिया , चाकू की नोंक संयोगिता के गले में रखकर वो हवेली के बाहर आया और सबको धमकी देते हुए बोला
"खबरदार, अगर किसी ने भी हमें हाथ लगाने की कोशिश की। थानेदार सुन हमारी बात, तेरी हिम्मत कैसे हुई हमें पकड़ने के लिए यहां तक आने की। क्या तूने हमें कोई साधारण सा राह चलता आदमी समझ लिया है क्या? शायद तुझे पता नहीं कि तुझ जैसे दो कौड़ी के थानेदार को हम चुटकियों में मसल सकते हैं तेरी औकात हमारे सामने एक मच्छर के बराबर भी नहीं है। नौकरों की फ़ौज हमारे आगे पीछे घूमती रहती है। दो कौड़ी के गांव वाले हमें मारेंगे? सुन लो गांव वालों अगर तुम लोगों ने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो तुम्हारी चहेती इस संयोगिता की खैर नहीं।और इसके साथ साथ इसके भाई और दादी की भी जान जायेगी। इसलिए तुम सबकी खैर इसी में है कि हमारा रास्ता छोड़ दो ।"
माधव का रौद्र रूप देखकर थानेदार और गांव वाले डर गए और पीछे हट गए। माधव संयोगिता के साथ जीप की तरफ बढ़ने लगा तभी वो औरत दौड़कर आई और माधव का गिरेहबान पकड़ना चाहा माधव ने चाकू सीधे उसके पेट में उतार दिया।और उसे तड़पता हुआ छोड़कर
संयोगिता को जीप में धकेलकर वहां से फरार हो गया। ये सब कुछ इतनी जल्दी में हुआ कि किसी को सोचने समझने का मौका ही नहीं मिला। मानवेंद्र को जब होश आया तो उसने अपने ड्राइवर को गाड़ी निकालने के लिए कहा।और पुलिस वालों के साथ वो माधव के पीछे पीछे चल दिया.....
क्रमशः
लेखिका
संगीता शर्मा

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