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मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
तेरी आवाज सुनकर ही , तो मेरी नींद खुलती थी,
तेरी बातों के संग ही , तो मेरी हर शाम ढलती थी।
देखकर तुझको मुझे मिलता है कितना सुकूं...
मेरी जिंदगी है तू .... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं?
चाहती थी उम्र भर के लिए बस तेरा ही साथ,
अब छूट रहा हाथों से मेरे , मेरी जान! तेरा हाथ।
छोड़ न पाऊं तुझे , तू ही तो है मेरी आरजू.....
मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
हां मुझको याद है अब भी , वो तेरा मुझसे खफा होना
याद है यह भी , बिछड़कर मुझसे, वो तेरा खुद को सजा देना।
खफा होकर भी एक-दूजे से , होती रहती थी हमारी गुफ्तगू....
मेरी जिन्दगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
बड़ी हिम्मत है मुझमें , ऐसा लोग कहते हैं
न जाने जुदा होकर, कैसे वो लोग रहते हैं?
बड़ी प्यारी है हंसी मेरी , मगर कैसे अब मैं हंसू...
मेरी जिंदगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
तुम्हारे सामने अक्सर छिपा लेती हूं मैं , मेरी आंखों की नमी
मगर तन्हाई में रोती हूं , महसूस होती है हर पल मुझको तेरी कमी
मैं इतनी भी नहीं पत्थर कि दर्द-ए-जुदाई मैं मुस्कुरा कर सह सकूं...
मेरी जिंदगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
मेरे सीने में भी है एक दिल जो तेरे नाम से धड़कता है
तेरी आवाज सुनने को, मेरा मन कितना तड़पता है
हमारे प्यार के अफसाने अब रो-रोकर मैं कहती फिरूं...
मेरी जिंदगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
मेरी जिंदगी है तू.... तू ही बता
तेरे बिना कैसे मैं रहूं ???
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लेखिका :- रचना राठौर

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