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कभी कभी सोचती हूँ कैसी लगी हैं तुमसे 
और क्यूँ आजाती हूँ तेरी प्यारी बातो में
कोई नशा हो या कोई जादू समझ नहीं पाती 
कोई भी खो जाए,गजब की कशिश तेरी आँखों में हैं

जब से तेरी प्यार के अहसास दिल में हुआ हैं
मैं  ही नहीं  मेरी रूह भी तुझे महसूस किया हैं
अब ऐसा लगता ही नहीं कभी अनजान थे हम तुमसे
ऐसा लगता हैं दिल का रिश्ता हमारा कई जन्मो से हैं 

अब डर नहीं लगता मुझे रात को सोने से कभी
बहुत खुशियों से भरी हैं सपनो के महफिल हमारी
एकेले में भी दिल अब कभी तन्हा नहीं रहता हैं
ऐसा कुछ ख़ास असर तेरे मीठी यादो में हैं

जानती हूँ तेरे होठों की हँसी और दिल की सुकून हूँ मैं 
तू भी जनता हैं दुनिया में बस तेरे लिए ही सगी हूँ मैं
अब तक जैसे चाहा सबने सता लिया मुझे पराई मान कर
क्या बताऊ ज़िन्दगी में कोई गैर भी मिला अपनों में हैं

बहुत महफूज़ पाती हूँ खुदको मैं तेरी पनाहओ में
प्यार ही प्यार बिखरा हैं देखो चाहत के इन फिज़ाओ में
वीरान थीं जो आँगन कभी उसमे प्यार के कालिया खिल गयीं
ज़िन्दगी गुलज़ार होगई मेरी इतनी सच्चाई तेरे प्यार में हैं

सुनो... क्या हुआ अगर थोड़ी फासला हैं तेरे मेरे दरमियाँ
उदास क्यूँ होते हो,अपना भी होगा एक खूबसूरत सी चाहत की दुनिया
ये दुनिया क्या कायनात भी गवाही देगी हमारी मोहब्बत की
इसि ख्वाहिश में ये नैना राह देखती हुई तुम्हारी प्रतीक्षा में हैं
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नैना...✍️✍️💞💞💞

(काल्पनिक...)