कर रही हूं प्रतीक्षा
भगवन कब आओगे
हो रहा पाप धरती पर
कब मुक्ति दिलाओगे,
हो रहा पिशाच कर्म,
नहीं सुरक्षित नारी और गौ धर्म,
भ्रष्टाचार रुपी दानव
अपने पाँव पखार रहा,
भगवन कब आओगे
कर रही हूं प्रतीक्षा
कब सुदर्शन दरस दिखलाओगे,
पथिक हूं मैं कुछ पल की
किंतु अति चिंतित हूं
देख विपदा संसार में
प्रसन्न नहीं किंचित हूं
हो रहा अन्याय है,
पीड़ितों को नहीं मिलता न्याय है,
झूठ, लोभ,मोह,पाखंड
हर तरफ है बस रहा
मानव ही मानव का दुश्मन
बस अब बन रहा,
मानवता का हो रहा त्रास है
प्रभु तुम्हारी आस है,
तुम्हारी प्रतीक्षा में प्रभु अब तो चलती मेरी सांस है...
निकेता पाहुजा
रुद्रपुर, उत्तराखंड

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