एक बार :

मानव ने  शेर, चिड़िया , कुत्ता व मुर्गे को एकत्र किया व पूछा ,"--तुम्हारी तुलना में मैं बुद्धि में अधिक हूं .! मेरा सबसे महत्वपूर्ण अंग मेरा मस्तिष्क ही है, जिससे मैं पूरी दुनियां पर राज कर सकता हूं ..! जिसका भार 1400 ग्राम के करीब है । है कोई मुझसे अधिक ..? विद्वान ..?!! बोलो ..?मैंने ये अविष्कार किए ,सभी कुछ अपनी बुद्धि से बनाया ..सभी कुछ ..!"

मानव की ऐसी बातें सुनकर शेर गुर्राया व बोला ,"-- तुम जो भी कहो मानव..! मुझे जंगल में देखकर तुमने ही तो बड़े बड़े लेख लिखे थे ,कि मैं जंगल का राजा हूं ..! भला अब तुम कैसे कह सकते हो कि, तुम्हारा मस्तिष्क मुझसे अधिक शक्तिशाली है ..! आजकल जो ताकतवर है वही दुनियां पर राज कर सकता है ..! जैसे मैं ..!"

मानव उसका उत्तर सुन असंतुष्ट रहा ..! 

फिर :
कुत्ते ने बोलना शुरू किया बोला ,"-ऐ मानव ..! तुम ही कहते हो ना अपनी गली में कुत्ता भी शेर होता है तो , मैं अपनी गली में तो पूंछ ऊंचा कर गर्व से रहता हूं । तुम अपनी गली के किसी मकान में चिल्ला सकते हो क्या ? जैसे मैं करता हूं ! दूसरी गली के कुत्ते मेरे सामने फटकने की हिम्मत भी नहीं सकते ..! बोलो अब मैं बुद्धि से बड़ा हूं ना ..?!"

मानव खामोश रहा ..उसे कुछ समझ नहीं आया ..!
फिर एक मुर्गे की बारी आई थी वह बोला,"--मानव मैं तो सुबह चार बजे दुनियां को जगाने के लिए उठ जाता हूं ,मेरे नियम कानून से  दुनिया बढ़ती है । दिन के सारे कार्यों की शुरुआत होती है ..! तो बताओ मैं बुद्धि में पीछे कैसे .? बड़े -बड़े राजाओं व उद्योग पतियों को जगाता हूं ..! मेरा महत्व वहीं समाप्त नहीं होता कटकर भी इंसान को तृप्त करता हूं ..! देखो कितना महत्व है मेरा ..! मरने के बाद भी लोग मेरी वाह वाही करना नहीं भूलते ..! बताओ ..?"

इंसान को कुछ समझ नहीं आ रहा था ..!

आखिर में चिड़िया की बारी आई वह चींचीं की प्यारी भाषा से बोली ,"--मानव सच कहा तू बहुत बलशाली है ..! मैं परसों अपने नीड़ में बच्चों को लेकर सोई थी ..! तूने आकर मेरे घरौंदे को नष्ट कर दिया । क्योंकि तू उस पेड़ को ही काट डाला , जिसने तुझे कभी छांव दी ,फल दिया, लकड़ी दी,सांस के लिए ताजी ऑक्सीजन दी क्योंकि एक बड़ी फैक्ट्री का निर्माण करना था ..जब तक हरे भरे पेड़ पौधों को ना काटा जाता तब तक तेरे लिए असम्भव था ..! लेकिन , जब पेड़ कट गया था तब भूमि पर मेरे चार नवजात बच्चे मर ग‌ए ..और कल तुम्हारी फैक्ट्री की नींव पड़ रही है मेरे बच्चों की समाधि के ऊपर ..! यही बुद्धि की ताकत है ..! स्वार्थ,लोभ ,अविवेक व महत्वाकांक्षा ..!"

"हम चार और कोई नहीं ,तेरे अंदर के भाव हैं ..उनकी तुलना जानवरों से ना करना ", कहकर चारों आकृतियां गायब हो गई ।
दुखी मन से मानव सोचता रह गया ..! उसकी पलकें बोझिल हो गईं..!

सुनंदा ☺️