साधना, एक योग, एक तप
युगांतर कालों से चलित,
अदृश्य, किन्तु अस्तित्व मान,
साधना के प्रारूप अनेक
साधक के रूप अनेक 
ईश्वर प्राप्ति को साधना
जिस प्रकार साधु करे,
उसी प्रकार मातृभूमि की रक्षा को,
एक फ़ौजी साधना करे,
जैसे धर्म और संस्कृति की रक्षा
साधु मुनि करें, उसी प्रकार
सरहद की रक्षा हमारे वीर जवान करे 
चाहे रेगिस्तान सी तपती धूप हो,
चाहे हो सियाचिन की बर्फ़ीली सरहद,
हमारे देश के वीर जवान पथ पर अपने डटे रहे 
घर परिवार से मीलों दूर,
चाह नहीं कोई उत्सव और त्यौहार की
बस साधना देश के सम्मान की,
 निभाया जिसने जल, थल और नभ की रक्षा का दायित्व,
देश की रक्षा को बनाया जिसने सच्चा साधत्व,
राखी, होली और दीपावली कर दी जिसने न्योछावर,
मेरी नज़र में फ़ौजी से बड़ा नहीं कोई साधक।

निकेता पाहुजा
रुद्रपुर, उत्तराखंड