ऐ मेरे इस सृष्टि के कर्ता-धर्ता, करूं मैं तेरी आराधना।

तू देने वाला सब कुछ इस जग में, तेरे आगे कोई कुछ भी ना।

तेरी आराधना से ही प्रभु, हर दिन शुभमय बन जाता है।

तू ही इस जग का पालनहारी, तेरी मर्जी के बिना कोई कुछ न पाता है।

पर इस कलयुग में मानुष ने,आराधना को भी पाप का हिस्सा बनाया है।

इस कलयुगी संसार की हालत देखकर ,मेरा प्रभु मानुष की उत्पत्ति पर पछताया है।

आराधना का लेकर सहारा,कलयुगी मानुष इस धरती को कलंकित कर रहा।

जो थी किसी युग में प्रभु को पाने की कुंजी,आज मानुष उस आराधना को भी शर्मसार कर रहा।

हे मेरे प्रभु आओ इस कलयुग में भी,इस संसार का उद्धार करो।

समझाओ आकर इस कलयुगी मानुष को, कि मानुष जन्म को सुधारो और आराधना करो।

- नीति अनेजा पसरिचा
  रुद्रपुर,उत्तराखंड