साधना अधिकतर हम इस शब्द को पूजा पाठ से जोड़ कर ही देखते हैं ,
हमारी प्राचीन आर्य संस्कृति में असंख्य अलौकिक उदाहरण है कठोर तपस्या के ,भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सुकमारी पार्वती की कठोर साधना ,जगत में सर्वोच्च स्थान पाने के लिए मां के निर्देशानुसार भक्त ध्रुव की बाल्यावस्था में कठोर साधना ,ऐसे असंख्य अलौकिक उदाहरणों से हमारी संस्कृति विश्व में पूजनीय है ।
पर लौकिक जगत में भी हम देख सकते हैं साधनारत लोगों को ,एक बच्चे को शैशवावस्था से उच्च पद पर आशीन होने तक माता-पिता की पालन पालन पोषण रूपी सुगठित व्यवस्था साधना का ही तो रूप है ।
बच्चे के उज्जवल भविष्य के लिए निस्वार्थ माता पिता का संलग्न होना साधना ही तो है ,उन्नत पद पर शोभायमान पुत्र मां पिता की निरंतर साधना का ही तो प्रमाण है ,
घर को कुशलता से संचालित करना घर के सभी सदस्यों को संतुष्ट करना एक स्त्री की साधना ही तो है ,।घर के सभी सदस्यों की जरूरतों को समय पर कुशलता से पूरी करना एक पुरुष की साधना है ।
छात्रों के उन्नत भविष्य के लिए एक शिक्षक की लगन भी महत्वपूर्ण होती है और छात्रों के उन्नत परीक्षा फल की प्राप्ति शिक्षक की साधना का ही तो प्रणाम होती है ।
एक कठोर पत्थर को छेनी हथौड़ी की हल्की हल्की चोट से मूर्ति का रूप देकर मंदिर तक पूजन के लिए स्थापित करना एक मूर्तिकार की निष्काम साधना है । सूखी मिट्टी को गीला कर एक मूर्ति का आकार दे रंग रोगन करना और उसमें जीवन का अहसास कराना एक कुम्हार की अदृश्य साधना है ।खेत में बीज बोकर रात दिन एक कर अनाज पैदा कर हम सबकी भूख शांत करना किसान की अदृश्य साधना है ।
हम सब किसी न किसी साधना में तल्लीन रहते हैं हमारे मधुर और सहयोगी व्यवहार से सामाजिकता बनी रहे यह हमारी साधना है ।

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