डिप्रेशन या अवसाद कहें, यह गंभीर समस्या है।
बढ़ रहे अवसाद ग्रसित,नाकामयाबी समस्या है।
कहीं परीक्षा कहीं रोजगार,डिप्रेशन का कारण।
असफलता मिलने से बढ़ता,अवसाद अकारण।
कहीं गृह कलह कभी,अपमान बन रहा कारण।
पति पत्नी बच्चे का ये,व्यवहार बनरहा कारण।
कभी व्यावसायिक घाटा,कभी बेकार उत्पीड़न।
डिप्रेशन में ले जाता है,बेवजह पुलिस उत्पीड़न।
कार्यक्षेत्र में सहकर्मी के,झूठे दोषारोपण कारण।
प्रेम में असफलता भी,होता डिप्रेशन का कारण।
डिप्रेशन में व्यक्ति हमेशा,अकेला ही चाहे रहना।
परेशान रहेगा केवल,समझाने पर माने न कहना।
कुछ अच्छा लगता न उसे,गलत विचार ही आते।
कभी-कभी हिम्मत हार,आत्महत्या हैं कर जाते।
यह बिलकुल ठीक नहीं,डिप्रेशन की नहीं दवाई।
ऐसे कृत्यों से परिवारों पर,बड़ी आफ़त भी आई।
हिम्मत कभी न हारें,न अवसाद का बनें शिकार।
अपने लोगों से चर्चा करें,मन से त्यागें ये विकार।
वर्तमान में कोरोना कहर,ने भी अवसाद बढ़ाया।
डिप्रेशन के कारण भी, बहुतों ने है जान गंवाया।
10में5स्त्रियाँ 10में1पुरुष,4में1बच्चा डिप्रेशन में।
डबलूएचओ के अनुसार,छपी है उसकी रिपोर्ट में।
आत्महत्या का प्रमुख कारण,डिप्रेशन है भारत में।
10देशों में ये सबसे ज्यादा,आज हो रहा भारत में।
कभी-2 माँ-बाप के वर्ताव,डिप्रेशन में ले जाता है।
बच्चे की अक्सर बात सुनें ना,डिप्रेशन में जाता है।
एक नहीं सैकड़ों कारण हैं,हो जाता है ये अवसाद।
अगर डिप्रेशन नहीं हुआ,किसी को तो है अपवाद।
इससे हमको बचना है,अपने बच्चों को बचाना है।
रोक टोक ना करें ज्यादा,कोशें ना उन्हें बढ़ाना है।
मोबाइल ने भी लोगों को,लोगों से अलग रखा है।
सब से मिलें बैठें हँसे बोलें,बात करें रोक रखा है।
प्रेम भरा माहौल बनायें,रहे न कॉम्युनिकेशन गैप।
गीत सुनें संगीत सुनें,टीवी देखें पढ़ेंलिखें देखें मैप।
कभी किसी से करें ना तुलना,हर बच्चा अच्छा है।
कोई किसी गुण में अच्छा,कोई किसी में अच्छा है।
समय इसे दें जरूर करें, योगा मेडिटेशन व्यायाम।
सुन्दर आध्यात्मिक बुक पढ़ें,नित्य करें प्राणायाम।
निगेटिव न सोचें बिलकुल,पाजिटिव विश्वास भरें।
दुनिया बड़ी हसीन है,आनंद उठाने की आस भरें।
लहरों से डर कर नाविक की,नैया पार नहीं होती।
नाविक के हौसले से ही,मंझधार में भी पार होती।
पाता वही सफलता है,डटकर जो स्थिति से लड़े।
निर्बल है बुद्धि से बीमार है,जो स्थिति से ना लड़े।
अवसाद डिप्रेशन में रहना,ये अच्छी बात नहीं है।
न खायें पियें न बात करें,यह अच्छी बात नहीं है।
समाधान हर दुःख का है,कोई न कोई हल मिले।
जान गवां कर इसमें,अवसादी को कुछ ना मिले।
अवसाद में आत्महत्या,कर लेना ही कायरता है।
डिप्रेशन से उबरना सीखें,जीवन की सफलता है।
रचयिता :
डॉ.विनय कुमार श्रीवास्तव
वरिष्ठ प्रवक्ता-पी बी कालेज,प्रतापगढ़ सिटी,उ.प्र.

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