मनुष्य और पशु का जीवन
एक दूसरे से बहुत अंतर होता है
जहाँ इंसान हर तरह से सिक्षित है
वही पशु बिलकुल अज्ञान
यहाँ तक हम मनुष्य जुबाँ से बोल सकते है
अपना दुःख दर्द हर किसी से
अपनी जुबाँ से सुना सकते है
लेकिन पशु पंछी बोल नहीं सकते
और नाही अपनी सुख दुःख की कहानी
किसी के साथ बयां कर पाते है
फिर भी मनुष्य से तुलना मे ज्यादा है
कहें तो न बोलने के सिवा
हमसे बहुत समझदार होते है
भले हम इंसा कितना भी
सिक्षित व बुद्धिमान होजाए
लेकिन इसका अहंकार भी
हम इंसान को ही होता है
फिर काहेको बुद्धिमानी कहें इसे
कभी आपस मे मतभेद होजाता है
किसी को किसी पर से विश्वास टूट जाता है
पल मे कह देते है की
"तुमसे तो अच्छे तो जानवर होते है
जो अपने मालिक के साथ कभी
अपना वफ़ादारी नही भूलते है "
उसी पल हम इंसानों की पलड़ा
पशुओ के आगे गिरा देते है
और सही भी है इस जहाँ मे
जब मनुष्य ही आपस मे लड़ने लगते है
तो खुद का अस्तित्व खो कर
पशुओ मे खुद को तब्दील कर लेते है
जहाँ पशुवे जितना मिले भोजन
उसी मे संतुष्ट होजाते है की
आज इतना ही भाग्य मे था
वही इंसान खुदगर्ज इतना निकले की
खुद के साथ औरो का भी
हक खा जाया करते है
ऐसे बहुत से लोग है दुनिया मे
जिन्हे पशुओ और पंछीयो से
दोस्ती करना या निभाना बहुत अच्छा लगता है
और वो दोस्ती वाकई मे
बहुत ही दिलकश और सच्ची साबित होती है
क्योकि एक विश्वास अटूट
जो पता होता है वो कभी तोड़ेगा नहीं
हमारी जो राज़ है जो खुलकर बयां कर देते है
ये सच्चा दोस्त है कभी किसीसे
किसी भी हाल मे बताएगा नहीं
यही कारण है शायद ज़मीं पर
इंसान से ज्यादा पशु पंछीओ की
तुलना बढ़ती जारही है
हम इंसान होकर भी खुद को
पशुओ मे ज्यादा पाने लगे है
और पशु अज्ञान होकर भी
इंसानों से भी ज्यादा समझदार होने लगे है
मनुष्य भूलने लगे जो इंसानियत
वो हर किरदार पशुओ मे पाने लगे है
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नैना.... ✍️✍️

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