तेरी मासूमियत सी बातों से यह दिल मचलने लगा है

जो पत्थर था बना अब वह भी तेरे आने से पिघल रहा है 

कुछ तो हलचल है मचा मन में मेरे तुम्हारे साथ पाने से 

फिर से मनोरम जीवन की  पहिया रफ्तार में चलने लगा




तेरे साथ आने से ही यह वैरागी दिल भी मचलने लगा है 

फिर से हर ग़म अब खुशियों के मौसम में ढकने लगा है 

क्या है तुम्हारे लिए मेरे इस शांत दिल की खामोशी में‌ 

फिर से यह धड़कने लगा है और फिर से अपनी करने लगा है




शायद तेरे साथ चलने से ही यह अब मन ही मन बहकने लगा है

जिंदगी की हर दुःख को भूलकर खुशियों में अब चलने लगा है

तेरी प्रेम छांव में यह फिर से हरा भरा होकर बढ़ने लगा है 

फिर से इस पतझड़ की सूखी वन में हरियाली सा चढ़ने लगा है





तेरे आ जाने से यह दिल फिर से अपनी करने लगा है 

फिर से खुशियों की बगीया में सुगंध सा भरने लगा है 

जीवन की प्रेम नगर में फिर अब नादान यह चलने लगा है

तेरी मासूमियत भरी बातों में यह दिल फिर से मचलने लगा है

                       ✍️ मित्र