मिट्टी का बदन मिट्टी में मिल जाना है।
काम करो तो भी या ना करो तो भी।
दान दो तो भी या फटकार दो तो भी।
रो रो कर गुजारो,या खुशियों से जिंदगी,
हक़ छीनों या दान देने के काबिल बनो।
हाथ फैलाओ या हाथ थामों किसी का।
प्रेम दो किसी को या बेवफाई का सबक।
हार कर बैठ जाओ या हौसलों से आगे बढ़ो।
बहानों में गुजारना है,या संघर्ष ही है जिंदगी।
फैसला तुम को करना, कैसे जीवन बिताना।
किसी के सांसों में बसना या दिल से उतरना।
नाम अपना बनाना या पुरखों का मान घटाना।
अपनी परेशानी में उलझकर रहना है।
या समस्या औरों के भी सुलझाने है।
आंखों के आंसू बनने है या पोंछने है।
खुशियां बांटना है या,गम में जीने है।
खुशियों की वजह बनना या दुःख की।
मिट्टी का बदन मिट्टी में मिल जाना है।


2 टिप्पणियाँ
आपकी रचना बहुत सुन्दर संदेश दे रही है। शुभकामनाएँ������������
परमानन्द