कुछ कहना हैं अभी तुमसे, कुछ बातें अभी अधूरी है,
जो दूर हुआ वो मजबूरी थी, पर मिलना तुमसे ज़रूरी है।
बैठो यहाँ दिल कुछ कहता है, सुन भी जाओ ये फलसफा जो मजबूरी है,
पहले दिल तोड़ना फिर मनाना, ये तुम्हारे दिल की कैसी फितूरी है।
बंजर है इस दिल की दीवारें, इश्क की बारिश होना भी ज़रूरी है,
रुक ना जाये धड़कन इंतजार में कहीं, तुम्हे ये समझना भी ज़रूरी है।
नहीं संभाल सकता इस इश्क को अब, टूटकर बाहों में बिखरना ज़रूरी है,
तुम समेट लो बाहों में मुझे, यही अब इस इश्क की दस्तूरी है।
मैं मिलना चाहता हूँ तुझसे खुद को खोने से पहले , तुझसे गले लगना ज़रूरी है,
बस तेरी यादों में टूटकर जीना है अब, ये जो रह गई जिंदगी अधूरी है।
रोक नहीं सकता सिलसिला इस दर्द का, आँखों से अश्कों का गिरना भी ज़रूरी है,
दिखा भी नहीं सकता ये अश्क जमाने कों, ए दिल ये तेरी कैसी मजबूरी है।
रोशन शर्मा

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