मैं संगीत भक्ति भाव की
अपने कान्हा को
करुं समर्पित

खो जाऊं मैं उन भक्ति भाव में
जहां मैं बस तुम्हें निहारुं
बन कर आ जाना एक छवि
जब मैं तुम्हें पुकारुं

ये अंखियां तो हैं तेरे दर्श को प्यासे
ये मन तेरे, काया तेरी
सिर्फ आश है हमारे

बन कर मैं भक्ति 
तुझे खुद को कर दूं समर्पित
थोड़ा थाम कर हाथ मेरा मुझे
 तुम भी अपना लेना
अपने कदमों में ही सही पर
 बस थोड़ी सी जगह देना

ये हृदय तो तुझ में रम जाना चाहे
बन संगीत तुझ में बस जाना चाहे
बारंबार ये तुझे ही आवाज लगाए

माता पिता और गुरु
हो तुम 
तुम बिन नहीं दूजा है कोई हमारे
तुम ही बताओ जाऊं तो जाऊं मैं
किसके दरवाजे

छोड़ ना देना
हे प्रभु हाथ हमारे
कर्म पथ पर हूं अभी

बनाएं रखना तुम अपनी
छत्रछाया मुझ‌पर
जब तक सांस चलेगी मेरे

                                      प्रिया✍️