"सत्य के लिए लड़ना चाहते हो,
तो ज़ख्मी तो होगे ही,
चोट भी लगेगी और हार भी मिलेगी।

झूठ को हराना आसान नहीं होता,
झूठ वार पर वार करेगा
नाजूक जख्म पर प्रहार करेगा
हराने का हर मुमकिन प्रयास करेगा।

पर तुम को यह जताना भी होगा,
सामने वाले को यकीन दिलाना भी होगा,
तुम को फर्क नहीं पड़ता उसके अत्याचार से,
तुम अडिग हो अपने कर्म के आधार से।

हार से घबराना नहीं, पैर पीछे हटाना नहीं
झूठ का परचम वो लहराएंगे,
हर हाल में तुम्हे डराएंगे, धमकाएंगे
तुम डर गए, झुक गए ,या चूक गए,
फिर तुम को आँखें भी दिखाएंगे।।

सच्चाई को सबूत की नहीं हौसलों की जरूरत होती
झूठ सबूत पर सबूत पेश करता है,
दलीलें नयी और पुरानी भी देती है।
उसके अंदर का डर उससे गलती करवायेगा
बस उसी पर ध्यान तुम्हें भी देना होगा
अपनी कामयाबी का परचम लहराना होगा।

तुम्हें भी अपना सीना फौलाद का करना होगा
अंदर के आत्मविश्वास को जगाना होगा
हर हाल में डटकर मुकाबला करना होगा
फिर देखना कामयाबी क़दम चूमेगी
झूठ हारेगा और सच्चाई की जीत होगी।।"


               
                  



            अम्बिका झा