वक़्त गुजरता रहा मेरा
कुछ उसके ख्यालों मे इस तरह
एक एक लम्हा कहर बन कर सितम डाता जा रहा
यादों के झरोखों मे झांक रही थी
कुछ धूल की परत चढ़ी हुई
तेरे दिए हुए जख्मों को अश्को से
धो रही थी
मै बैठी सोच रही थी
उस दिन को कोस रही थी
काश मिली ना होती तुझसे
ना ही तूने मुझे पर ये फरेब का जादू चलाया होता
मैंने भी तेरे हाथो यूँ धोखा ना खाया होता
तू तो हर एक से वफ़एँ निभाया करता
हर किसी अपनी बातो के जालो मे फसाया करता
कितने प्यार से तू प्यार निभाया करता
हर किसी को चने के झाड़ पर चढ़ाया करता
तेरे प्यार से मिला जो मुझे दर्द है
मेरी साँसों मे घुलता हुआ एक कड़वा जहर है
आलिया खान

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