तेरे मार्ग को कभी सूक्ष्म पत्थर ने तो कभी ऊँचे ऊँचे पहाड़ों ने अड़चन लगाया है
बार बार हिम्मत से टकराकर अपना रास्ता बनाया है
तेरा कोई आज तक बेड़ा नहीं पार कर पाया है
स्वयं को तूने बनाया है स्वयं को तूने सँवारा है
भावनाओं की लहर मे बहती धारा है
दो प्यार के मीठे बोल सुनकर तेरा हृदय द्रवित हो जाता है
जहर घूँट का पी जाती हो सदा मुख पे मुस्कान लिए रहती हो
प्रत्येक कार्य क्षेत्र में अपना झंँडा गाड़ के आती हो
फिर बार बार तुम ही क्यूँ छली जाती हो
बार बार तुम ही क्यूँ तराजू मे तौली जाती हो
कहने को तो स्त्रीयाँ कंँधे से कंधे मिलाकर चलती है
बार बार कयूँ तुम ठगी जाती हो
सशक्त शिक्षित नारी हो
बार बार कयूँ तेरी आत्मा से खिलवाड़ किया जाता है
अपनी नारी को सात दरवाजे मे बंँद रखना चाहते है
परनारी को वासना की निगाहों से क्यूँ ताड़ते है
बार बार तुम्हें ही क्यों जीवन.की कसौटी मे खड़ा
किया जाता है
नहीं होगा किसी के पास इसका जवाब
करे क्या मौन रहने का जो रिवाज.है
तमाशाबीन और पीठ पीछे बोलने
मे तीसमारखाँ की उपलब्धी जो प्राप्त है
सदियों से कुकृत्य चला आ रहा है
एक बार सभी रोष एवंँ जोश दिखाते.है
उतने ही जल्दी ठंँडे पड़ जाते है
शिल्पा मोदी ✍️✍️

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