जमाने की लालच,कहावत की पोथी
पोथी जहाँ न थी रोटी,वहाँ भी है पोथी
किताबें हैं मोटी,मगर फिर है पढ़ना
कहावत की किताबें,पोथी पलटना
जमाने की लालच......
ये लालच ही जो,हमें तो पढ़ाया
अहंकार खुद की,जो हमको जिताया
ये बल की तरक्की,ज़मी पर हम ठहरे
कदम को बढ़ाया,फिर चलना सिखाया
जमाने की लालच......
ईष्या जो मन की,गलत राह हटाया
धृना विशाख्त जो,शरीर स्वस्थ बनाया
फिर क्रोधों के लपटों से
जलन के नजरों से बचाया
जमाने की लालच......
सहीं सोच रखना,सहीं काम करना
इसारों की ताकत,चलाये न तुम पर गोली
बहुत प्यार से तुम सबको बढ़ाना
बच्चों के भविष्यों को,आगे बढ़ाना
जमाने की लालच......
लेखक:- विकास कुमार लाभ
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