मै क्यों लिखता हूँ,,, 
जिंदगी के इस सफर में 
खुशियो से भरता लेखन 
समय के साथ अपने 
 विचारो को समाज के
 समक्ष रखना है लेखन, 
लेखन एक पवित्र कार्य है,
 लेखन खुद से खुद के मिलन का नाम है
 लेखन से आत्मिक शांति मिलती है
 लेखन एक मखमली सुकून देता है
 चेतना को स्फूर्ति देता है,
समय की धार पर लेखन की गति नए कीर्तिमान रचती है
ये कलम का कमाल है 
 जो नित नवीन आयाम और प्रमुदित रंगों से मन को भरती है, 
लेखन एक अदभुत कला है,जो नित्य हमे 
 सौम्यता और निश्चलता से भरती है,
 लेखन करना जीवन का सम्मान है, 
संस्कृति की पहचान है,
 अस्मिता की प्रसार शक्ति साहित्य ही देती है,
 ये सत्साहित्य लेखन 
 भारतीय संस्कृति,गरिमा के ओज का बहुमान है
 श्रुति ,करती इस महान साहित्य लेखन को प्रणाम है,
 जिस ने दिए सरस्वती पुत्र महान है।
स्वर्णिम हिंदी साहित्य हिन्द का प्राण है,
हिंदी साहित्य ही भारत की शान है,
 प्रतिभा का संम्मान है, 
लेखन ही आत्मा का प्राण है,
 विश्व का स्वर शंख नाद है
 श्रुति सदा करती 
लेखन को प्रणाम है,
 प्रणाम है,प्रणाम है
शत शत प्रणाम है,,,,।




 डॉ .सुरभि जैन "श्रुति"
     सतना म.प्र.
    🌸🌼🌻