पढ़कर मुस्कुराना तो ख़ैर... आसान है लोगों

मगर खुद को स्याही में ढालना .. आसान नहीं

या  यूं कहिए..
कि ये हुनर .....ख़ैर जिन्हें भी मुकम्मल हुआ

उस सफ़र से गुजरना भी... ..आसान नहीं

अब और क्या कहें
उनका हाल तो ख़ैर कोई ही बयां कर सके

न गुज़रे कोई उनसे.... वो गलियां आसान नहीं

ख़ैर अब जाने भी दो
नाम तो ख़ैर....कुछ मायनों में आसान है लोगों

मगर जिंदगी का नज़्म बन जाना... आसान नहीं

एक छोटी सी बात
कागजों को तवज्जो देते... तो ख़ैर बहुत हैं लोगों

मगर खुद को काग़ज़ पर बिछाना... आसान नहीं

जरा ग़ौर करिएगा
लिखना तो ख़ैर... फिर भी आसान है लोगों

मगर हर दर्द लिख पाना.... ..आसान नहीं

और हां ये सच है
इक उम्र जीना भी  ख़ैर आसान  है लोगों

 मगर मरके भी जिंदा रहने का हुनर आसान नहीं



          हर कवि को समर्पित


मुझे नहीं पता कि कविता क्या है, ... मैं केवल अपने भावों को व्यक्त करती हूं
   
...... ✍️🌅🙏 ऋतु बाजपेई