🌷🌷  नन्ही सी अंश की   🌷🌷

मैं हूँ आपकी एक नन्ही सी अंश,
आपकी गोद में आकर खेलना चाहती हूँ। 

मां मुझे कोख में मत मार,
मैं इस संसार में जीवन को जीना चाहती हूँ। 

पापा इन रिश्तों के ताने बाने में बंधना है मुझे,
खुद एक दिन जीवनदात्री के रुप में जीना चाहती हूँ। 

नानाजी ने जो मायने सिखाए आपको जिंदगी के,
उन मायनो को मैं भी अपने में शामिल करना चाहती हूँ। 

नानीमां ने जिन सर्वगुणों से पूर्ण किया आपको,
उन गुणों से मैं स्वयं पूरित होना चाहती हूँ। 

दादाजी के पीठ पर चढ़कर खेल खेल में,
संस्कार रूपी बचपन का सबक सीखना चाहती हूँ। 

दादीमां के सयाने पन को, 
मैं भी अपने जीवन में संवारना चाहती हूँ ।

भैय्या के माथे पर तिलक लगाकर,
हाथों में रेश्मी धागो का अटूट बंधन बांधना चाहती हूँ ।

दीदी आपकी छाया में बड़ी होकर,
आपके आदर्श को संग लेकर चलना चाहती हूँ ।

छोटे भाई को प्यार देकर, थोड़ी शरारत कर,
अपने बड़प्पन का मजा लेना चाहती हूँ। 

छोटी बहना से लाड़ लडा़,खूब बतिया,
उसे सही गलत में फर्क बताना चाहती हूँ। 

मैं हूँ आपकी एक अजन्मी सी अंश,
आपके परिवार का हिस्सा कहलाना चाहती हूँ। 

मां मुझे इस दुनियाँ में आने दो न,
मैं इस खूबसूरत दुनियाँ को अपनी आंखो से देखना चाहती हूँ

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              राजेश्वरी ठाकुर