मेरे लाखों की वो  मेरी कमाई है 

एक अदद रूबाब लिए मेरा भाई है 

रोका नहीं कभी दुनिया की तलाश से 

मेरे आगे रहा रास्ते को देखा किया करीब से 

कभी हम जोली कभी साथी कभी कठोर रहा

जैसी जहा मुझे जरूरत रही वो वैसा बन रहा 

आते जाते वक़्त की दूरी से डर गए 

हम दोनों अपनी अपनी गृहस्ती में रम गए

ना वो रोज मिलता है ना बात हो पाती हैं

मै जानती हूं फिर भी उसे मेरी फिक्र रहती है

मन्नत के धागे बांधे हर बार उसकी उम्र के लिए

वो मेरा भाई उसी धागे से मेरी खुशियां मांगता है



                     रेणू सिंह