माँ तू बड़ी नादान है
बड़ी अनजान है
आता ही नही ढंग तुझे यहाँ का..!!
ये भी कोई आन है
माँ तू बड़ी नादान है।।

जाने क्यों कुछ नही समझती हो,
हर पल लगी रही मुझमे कहीं हो
क्या भला है तेरे ख़ातिर
कुछ नही तुझे वो भान है
माँ तू कितनी नादान है।।

स्वाद न जाने ,भेद न जाने,
नाम भर सुखीक्षणों से तेरे
रहती हर पल अनजान है,
उंगली भर रस से करती
तेरा बस पूरा रसपान है,
माँ तू कितनी नादान है।।

बिखरे घर में, बिखरे रहते 
तेरे खुद के तो श्रृंगार है,
मुझे सजाना ओर संवारने में
 रहते पल पल तेरे प्राण है,
माँ तू किन्नी नादान है।।
जाने क्यों इन्नी नादान हैं ।।

भोर न जाने नींद न जाने,
झूला गद्दा और बिछाने
करती सारे काम अविराम है,
तनिक पसीनें की बूंदों से मेरी
करदेती प्रभु हाय राम है।
माँ तू कितनी नादान है।।

कब टॉक लुटाती रहेगी अपना पल पल तेरा ये जीवन...
जो निश्छल ओर निष्काम है,
स्वार्थ न जाने आराम न जाने... 
हम बच्चों पर ही पल पल कुर्बान है,
माँ तू मेरी भोली सी
माँ तू सयानी सी मेरी
मेरी माँ कितनी तू नादान है

मेरे लिये हंसी से
तेरा मुस्काना
सरल करती जीवन के व्यवधान है ,

देव न हो सकता हर पल
सो होता अस्तित्व तेरा यह महान है,
तू ही होसकती है इतनी प्यारी माँ,
तेरे तर्पण को कोटि-कोटि
बारम्बार मेरा प्रणाम है।
तेरे ममतामयी फटकार को,
तरसता वो भी है ऊपरवाला
गोदी में सहलाने को,
पलना झूला झुलाने को 
बरबस ले ही लेता अवतार है,
फिर भी मोल न जाने अपना...
मेरी माँ ,ओ मम्मा
 तू कितनी ...कितनी नादान है।। 
ग़लती करना मेरा काम 
भूला देन तेरा माँ नाम है।
माँ तू है प्यारी कितनी लेकिन नादान है.....

बचपन मे पढ़ी ये चन्द पंक्तिया अक्सर याद आजाती है👉
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हाथ बढ़ा जो आती थी,
चलना हमें सिखाती थी,
किस्से चाँद सितारों के,
धरती और पहाड़ों के,
कहती थी जो कई- कई,
बातें हमसे नई नई
सबसे पहला है ये काम,
उस माता को करो प्रणाम..
🙏🏻🙏🏻🙏🏻💕🙏🙏🙏

भारती प्रवीण...✍️💕