ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी, 

पतझड़ बाद छायी, 
हरियाली, 
मलय पर्वत से आयी, 
पुरवाई, 

ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी, 

पीली पीली सरसों, 
फूल रही, 
कूक रही कोयलिया, 
होके मतवाली, 

ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी, 

प्रीत की ओढ़ चुनरिया, 
झीनी झीनी, 
लिपट रही डाली डाली, 
आलिंगबद्ध हो, 

ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी,

भाल सजाये भास्कर,
ज्यौं मुखड़ा, 
रक्ताभ सजी बिंदिया, 
पीत चुनरिया, 

ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी, 

झूम झूम रही अमरायी, 
मधुमास लायी, 
सांध्य बेला बहार छायी, 
बासंती संग आयी,

ऋतुराज बसंत आया, 
बांसती बहार छायी, 

खुशियों की सोगात लायी, 
ऋतुराज संग आयी, 
ये रसरसिका करने आयी, 
मनुहार प्रेम का, 

ऋतुराज बसंत आया, 
बासंती बहार छायी ।

   काव्य रचना -रजनी कटारे 
        जबलपुर (म. प्र.)